महाराष्ट्र एफडीए ने सभी प्रमुख त्योहारों को शामिल करते हुए सालभर का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर जारी किया

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महाराष्ट्र एफडीए ने सभी प्रमुख त्योहारों को शामिल करते हुए सालभर का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर जारी किया

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 09:16 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 09:16 PM IST

मुंबई, तीन सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र में राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बृहस्पतिवार को सभी प्रमुख त्योहारों को शामिल करते हुए एक स्थायी, साल भर का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर जारी किया।

एफडीए के आदेश में गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा, क्रिसमस, नव वर्ष, मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, वट पूर्णिमा, रक्षा बंधन, नाग पंचमी, जन्माष्टमी, दहीहांडी, दशहरा, कोजागिरी पूर्णिमा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती जैसे त्योहारों का उल्लेख है।

बयान में कहा गया है कि यह कैलेंडर साल भर लागू रहने वाली ऐसी पहली स्थायी और व्यापक व्यवस्था है। इसे इसलिए शुरू किया गया है ताकि त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा उपायों की योजना पहले से ही बनाई जा सके और हर त्योहार के लिए अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता न पड़े।

आदेश में कहा गया है कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों, खाने-पीने के उत्पादों, डेयरी उत्पादों, खाद्य तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग में भारी बढ़ोतरी होती है, जिससे मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री की आशंका बढ़ जाती है।

इस नयी व्यवस्था का उद्देश्य संवेदनशील खाद्य उत्पादों और क्षेत्रों की पहले से पहचान करना, निरीक्षण और प्रयोगशाला परीक्षण को मजबूत करना तथा समय पर कार्रवाई कर समन्वित कदम उठाना है।

एफडीए ने इसके कार्यान्वयन के लिए त्योहारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है।

पहली श्रेणी के त्योहारों के लिए चार स्तरीय निरीक्षण व्यवस्था होगी। इसमें गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा, क्रिसमस और नव वर्ष जैसे राज्य स्तरीय त्योहार शामिल हैं।

दूसरी श्रेणी में मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, वट पूर्णिमा, रक्षा बंधन, नाग पंचमी, जन्माष्टमी, दहीहांडी, दशहरा, कोजागिरी पूर्णिमा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती सहित क्षेत्रीय त्योहार शामिल हैं। इन त्योहारों के दौरान भी जोखिम के आधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

तीसरी श्रेणी में स्थानीय त्योहारों, मेलों, जुलूसों और ग्राम स्तर के उत्सवों को शामिल किया जाएगा।

भाषा प्रचेता पवनेश

पवनेश