महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण संबंधी समिति का कार्यकाल बढ़ाया

महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण संबंधी समिति का कार्यकाल बढ़ाया

महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण संबंधी समिति का कार्यकाल बढ़ाया
Modified Date: August 26, 2026 / 10:16 pm IST
Published Date: August 26, 2026 10:16 pm IST

मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के प्रस्तावित अनिश्चितकालीन अनशन से पहले महाराष्ट्र सरकार ने 2023 में गठित उस समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया है, जिसे मराठा समुदाय के कुनबी रिकॉर्ड की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया था।

मराठा समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग कर रहा है।

पच्चीस अगस्त को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति का कार्यकाल एक साल बढ़ाकर 30 जून, 2027 तक कर दिया गया है। इस समिति का कार्यकाल 30 जून, 2026 को समाप्त हो गया था।

बहु-सदस्यीय समिति का गठन मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तय करने के लिए किया गया था। इससे वे ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ पाने के लिए पात्र हो सकेंगे। समिति को मराठा समुदाय के सदस्यों के कुनबी जाति से संबंधित रिकॉर्ड तलाशने का काम सौंपा गया था।

जीआर में कहा गया है कि कुछ जिलों में मराठा-कुनबी वंशावली का पता लगाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए समिति को अपना कार्य पूरा करने के लिए और समय दिया जाना जरूरी था। इसीलिए, वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की अध्यक्षता वाली मराठा आरक्षण संबंधी मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने समिति का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाने की सिफारिश की।

जरांगे ने मांग की थी कि मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं, ताकि वे ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ उठा सकें।

जरांगे हालांकि 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। उन्होंने ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग को दोहराया।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश


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