महाराष्ट्र: आरटीओ ने टैक्सी और ऑटो चालकों से मराठी में पूछताछ की; नोटिस जारी

महाराष्ट्र: आरटीओ ने टैक्सी और ऑटो चालकों से मराठी में पूछताछ की; नोटिस जारी

महाराष्ट्र: आरटीओ ने टैक्सी और ऑटो चालकों से मराठी में पूछताछ की; नोटिस जारी
Modified Date: August 20, 2026 / 06:00 pm IST
Published Date: August 20, 2026 6:00 pm IST

मुंबई, 20 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र में परिवहन विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को मराठी के कामकाजी ज्ञान की जांच के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किए जाने के बाद टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों से 16 सवालों का परीक्षण लिया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) की टीमें संतोषजनक जवाब नहीं दे पाने वाले चालकों को एक महीने का नोटिस दे रही हैं और चेतावनी दे रही हैं कि बाद की जांच में विफल रहने पर उनका बैज निलंबित कर दिया जाएगा।

‘मला सीएनजी भरायचे आहे. थोडे थांबावे लागेल’ (मुझे सीएनजी भरवानी है। थोड़ी देर रुकना होगा), ‘माझी रिक्षा/टॅक्सी शेअरिंगची आहे’ (मेरी ऑटो/टैक्सी साझा है) और ‘मीटर चालू केले आहे’ (मीटर चालू कर दिया है) ऐसे सामान्य जवाब हैं, जिनकी अधिकारियों को चालकों से अपेक्षा है।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक द्वारा बुधवार को घोषित यह अभियान राज्य सरकार द्वारा टैक्सी, ऑटोरिक्शा और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य किए जाने की दिशा में उठाए गए कदम के तहत चलाया जा रहा है।

आरटीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिवहन आयुक्त कार्यालय से 16 सवालों की प्रश्नावली मिली है और यह प्रश्नावली कोंकण साहित्य परिषद द्वारा टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों को दिए गए मराठी भाषा प्रशिक्षण पर आधारित है, जो स्वतंत्रता दिवस पर समाप्त हुआ था।

आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, सवाल इस तरह तैयार किए गए हैं कि औपचारिक रूप से भाषा के ज्ञान की जांच करने के बजाय चालकों को रोजमर्रा के काम के दौरान आने वाली परिस्थितियों को परखा जा सके। इनमें यात्रियों से यह पूछना कि उन्हें कहां जाना है, गंतव्य और दिशा समझना तथा किराए, मीटर, मार्ग और टैक्सी या ऑटोरिक्शा स्टैंड के बारे में बातचीत करना शामिल है।

मध्य मुंबई के दादर में जांच कर रहे एक आरटीओ निरीक्षक ने कहा, ‘हम यह जांच शुरू कर चुके हैं कि चालकों को मराठी आती है या नहीं। जिन लोगों को भाषा नहीं आती, उन्हें एक महीने का नोटिस दिया जाएगा और उस अवधि में मराठी सीखने के लिए कहा जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘अगर एक महीने बाद भी वे सवालों के संतोषजनक जवाब देने में सक्षम नहीं होते हैं, तो उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। उन्हें भाषा सीखने के लिए फिर एक महीने का समय दिया जाएगा। यह कार्रवाई जारी रहेगी।’

परिवहन विभाग ने आरटीओ अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने का भी निर्देश दिया है।

बुधवार को एक महीने के अभियान की घोषणा करते हुए मंत्री सरनाइक ने कहा था कि सरकार का उद्देश्य किसी की आजीविका प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मराठी भाषा और राज्य की पहचान तथा संस्कृति संरक्षित रहे।

उन्होंने कहा था कि 105 दिन चले अभियान के दौरान 1.65 लाख चालक पहले ही मराठी का प्रशिक्षण ले चुके हैं और उन्हें प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं तथा अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

यह कदम राज्य सरकार के टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए महाराष्ट्र में मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले के बाद उठाया गया है। राज्य सरकार ने हाल में इस आवश्यकता को लागू करने के लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है।

टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालक यूनियनों के कुछ नेताओं ने नियमों में मराठी के ‘कामकाजी ज्ञान’ की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने पर सवाल उठाए हैं।

सेवा सारथी टैक्सी यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार ने हाल में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य करने के लिए कानून में संशोधन किया है, लेकिन कामकाजी ज्ञान से क्या मतलब है, यह स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है। जाहिर तौर पर इससे आरटीओ में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।’

यूनियन नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अभियान के दौरान चालकों का आर्थिक शोषण हुआ तो वे आंदोलन शुरू करेंगे।

सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारियों ने भी कहा कि नियमों में कामकाजी ज्ञान के आकलन के लिए विस्तृत परीक्षा या मानकीकृत मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं।

आरटीओ के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘संशोधित नियमों में मराठी के कामकाजी ज्ञान को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि बैज जारी करने से पहले आरटीओ को चालकों की मौखिक या लिखित परीक्षा लेनी चाहिए या नहीं।’

सरनाइक के अनुसार, ऑटो और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी ज्ञान की आवश्यकता महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था। अब 12 अगस्त को किए गए संबंधित कानूनी संशोधन के तहत इस प्रावधान को सख्ती से लागू किया जाएगा।

भाषा

राखी नरेश

नरेश


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