मराठा आरक्षण आंदोलन: अंतरवाली सराटी गांव का विरोध प्रदर्शन स्थल 1,123 दिन के बाद खाली हुआ

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मराठा आरक्षण आंदोलन: अंतरवाली सराटी गांव का विरोध प्रदर्शन स्थल 1,123 दिन के बाद खाली हुआ

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  • Publish Date - September 26, 2026 / 04:49 PM IST,
    Updated On - September 26, 2026 / 04:49 PM IST

जालना, 26 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के जालना जिले में कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन के केंद्र बने अंतरावली सराटी गांव में लगे तंबू और मंच को 1,123 दिन के बाद आखिरकार हटा दिया गया है। स्थानीय सरपंच ने शनिवार को यह जानकारी दी।

सरपंच ने कहा कि मंच और तंबू को हटाने का फैसला स्थानीय निवासियों ने अपनी दैनिक गतिविधियों, यातायात की आवाजाही और इलाके को खुला रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया।

इस ढांचे को हटाए जाने के साथ ही मराठा समुदाय के सदस्यों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे की मांग को लेकर चले तीन साल लंबे आंदोलन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया।

गांव के सरपंच पांडुरंग तारख ने कहा कि इस इलाके में तीन साल से अधिक समय तक आरक्षण आंदोलन के दौरान कई प्रमुख घटनाक्रम देखे गए।

जरांगे ने मराठा समुदाय के लिए कुनबी वर्गीकरण के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त 2023 को इस स्थल पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

एक सितंबर 2023 को पुलिस लाठीचार्ज के बाद यह स्थल पूरे राज्य में चर्चा में आ गया था।

इसी मंच से जरांगे ने राज्य सरकार को बार-बार समय-सीमा दी, मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत की और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से अंतरावली सराटी आए हजारों समर्थकों को संबोधित किया।

तारख ने कहा कि 29 अगस्त 2023 से 25 सितंबर 2026 के बीच जरांगे ने उसी स्थल पर 11 बार भूख हड़ताल की।

कुछ दिन पहले अपनी 11वीं भूख हड़ताल के दौरान, जरांगे ने घोषणा की थी कि यह आंदोलन ‘निर्णायक और अंतिम’ होगा। इसके बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया।

भूख हड़ताल खत्म होने के बाद, ग्रामीणों के बीच तंबू और मंच के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हुई।

ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियों, यातायात की आवाजाही और इलाके को खुला रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, अंततः ग्रामीणों और सरपंच के बीच इस ढांचे को हटाने पर सहमति बन गई।

शुक्रवार देर रात आंदोलन के लिए इस्तेमाल किए गए तंबू, बांस के ढांचे और मुख्य मंच को हटा दिया गया।

भाषा जोहेब रंजन

रंजन