पटना, 26 सितंबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जब इस अधिकार का उल्लंघन होगा तो अदालतें इससे नजर नहीं फेरेंगी।
सीजेआई ने यह बात पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) में छात्रों के साथ संवाद के दौरान कही।
सीएनएलयू के एक बयान के अनुसार, एक छात्रा ने “छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई” को लेकर सवाल पूछा था।
यह सवाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के संदर्भ में था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था।
प्रधान न्यायाधीश ने सवाल पूछने वाली छात्रा से कहा कि पुलिस की ओर से कथित बर्बर दमन के मामलों में “अदालतें नजर नहीं फेरेंगी” और उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दोहराया।
एक अन्य छात्र ने पूछा कि कॉलेजियम के भीतर असहमति वाले विचारों को दर्ज तो किया गया, लेकिन उन्हें कभी सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘खुलासा विचाराधीन व्यक्ति को असहज स्थिति में डालने का जोखिम पैदा करता है, चाहे उसकी मंशा कितनी भी अच्छी क्यों न हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब व्यक्तिगत गरिमा का सवाल हो तो पारदर्शिता की भी सीमाएं होती हैं।’’
सीजेआई ने पूछा, ‘‘यदि कॉलेजियम की कार्यवाही में किसी न्यायाधीश के बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी शामिल हो तो कोई मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश अपना काम कैसे जारी रख सकता है?’’
सीएनएलयू के बयान के अनुसार, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव के साथ विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया। राव विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं।
भाषा शफीक रंजन
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