मंत्री झिरवाल के निजी सचिव रिश्वतखोरी से जुड़े ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद मूल विभाग में वापस भेजे गए

मंत्री झिरवाल के निजी सचिव रिश्वतखोरी से जुड़े ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद मूल विभाग में वापस भेजे गए

मंत्री झिरवाल के निजी सचिव रिश्वतखोरी से जुड़े ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद मूल विभाग में वापस भेजे गए
Modified Date: February 20, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: February 20, 2026 8:15 pm IST

मुंबई, 20 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल के निजी सचिव डॉ. रामदास गाडे को रिश्वतखोरी से संबंधित एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है और उन्हें उनके मूल विभाग में वापस रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि झिरवाल के निजी सचिव के रूप में प्रतिनियुक्ति पर रहे गाडे को 16 फरवरी से कृषि विभाग में सहायक आयुक्त (पशुपालन) के अपने मूल पद का कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है।

उन्होंने बताया कि आवश्यक आदेश जारी करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को एक पत्र भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि यह प्रशासनिक कार्रवाई झिरवाल के कार्यालय में कथित तौर पर किए गए एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद की गई है, जिसमें रिश्वत के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एक कथित ‘गुप्त कोडवर्ड’ का खुलासा हुआ।

पता चला कि फाइल पास करने के लिए फाइल पर पेन से एक लाइन खींचने का मतलब 50,000 रुपये की रिश्वत मांगना था, जबकि दो लाइन खींचने का मतलब एक लाख रुपये मांगना होता था।

गाडे का नाम तब सामने आया जब मेडिकल दुकान के मालिक निर्मल शर्मा ने आरोप लगाया कि दवाइयों के रेफ़्रिजरेटर में पानी की बोतलें और ओआरएस रखने पर उनका लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया।

शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने सात फरवरी को मंत्रालय में अपील दायर की थी जिसकी 13 फरवरी को सुनवाई हुई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह सुनवाई के लिए मंत्रालय गए, तो उन्हें गाडे के केबिन में बैठाया गया, जहां एक लिपिक राजेंद्र ढेरांगे ने कथित तौर पर 1.10 लाख रुपये रिश्वत के रूप में मांगे और कहा कि इसमें से एक लाख रुपये ‘वरिष्ठ अधिकारियों’ के लिए हैं जबकि खुद मेरे हिस्से की रकम 10,000 रुपये है।

शर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने इस राशि को बहुत अधिक बताया, तो उन्हें 50 प्रतिशत की छूट की पेशकश की गई। इसके बाद उन्होंने 2000 रुपये ऑनलाइन और 53,000 नकद दिए।

शर्मा ने आरोप लगाया कि जब वह 21 फरवरी को दोबारा मंत्रालय गए, तो झिरवाल अपने कार्यालय में मौजूद थे, लेकिन उन्हें मंत्री से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें फिर से गाडे के पास भेज दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद शर्मा ने पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से शिकायत की।

भाषा संतोष खारी

खारी


लेखक के बारे में