नागपुर महानगरपालिका चुनाव: टिकट न मिलने से नाराज कई भाजपा कार्यकर्ता निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे
नागपुर महानगरपालिका चुनाव: टिकट न मिलने से नाराज कई भाजपा कार्यकर्ता निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे
नागपुर, एक जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी के वर्षों से ‘वफादार’ कई कार्यकर्ताओं ने टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी है और अब आगामी नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) चुनाव निर्दलीय लड़ने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि पार्टी से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट न देने और उनकी जगह दलबदलुओं या बाहरी लोगों को टिकट देने से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया है और इसके चलते नागपुर में उनके इस्तीफे हुए हैं।
नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है।
नागपुर समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को होंगे।
नागपुर नगर निगम में 151 सीट हैं। भाजपा 143 सीट पर चुनाव लड़ रही है जबकि शिवसेना आठ सीट पर चुनाव लड़ रही है। अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) 90 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के सभी 151 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) 79 सीट पर चुनाव लड़ रही है।
लंबे समय से भाजपा कार्यकर्ता और पूर्व महापौर अर्चना देहांकर के पति विनायक देहांकर को वार्ड 17 से टिकट नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे। हालांकि, उनकी पत्नी ने इस फैसले का विरोध किया और कहा कि वह केवल भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगी और अपने पति का समर्थन नहीं करेंगी।
एक टीवी चैनल से विनायक देहांकर ने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से इस वार्ड और निर्वाचन क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हालांकि यह कांग्रेस का गढ़ था, फिर भी उन्होंने इस वार्ड में भाजपा को आगे बढ़ाने में मदद की।
उन्होंने कहा, ‘पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुझे आश्वासन दिया था कि वार्ड 17 में उम्मीदवार के नाम को अंतिम रूप देते समय पार्टी मेरे नाम पर विचार करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’
उन्होंने कहा, “अगर पार्टी के किसी युवा कार्यकर्ता को टिकट दिया जाता तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन टिकट स्थानीय सदस्य को न देकर बागी सदस्यों (कांग्रेस से आए सदस्यों को और अन्य वार्ड के सदस्यों) को दिए गए। यह बहुत निराशाजनक था। इसलिए मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।”
उन्होंने कहा, ‘मैंने भारी मन से भाजपा से इस्तीफा दिया।’
विनायक ने कहा कि उनकी पत्नी (भाजपा की राज्य पदाधिकारी) उनके इस फैसले से नाराज हैं।
इसी तरह, वार्ड 16 (डी) में वार्ड अध्यक्ष गजानन निशितकर को पार्टी द्वारा टिकट देने से इनकार किए जाने के बाद लगभग 80 भाजपा कार्यकर्ताओं ने वार्ड अध्यक्ष गजानन निशितकर सहित इस्तीफा दे दिया।
‘पीटीआई भाषा’ से निशितकर ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से भाजपा के साथ विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं और उन्होंने पार्टी के विकास में योगदान दिया है।
निशितकर ने कहा कि उन्हें 2017 के नगर निगम चुनावों में ही टिकट मिलना था लेकिन पार्टी ने किसी और को मौका दिया और उन्होंने उस समय के फैसले का सम्मान किया।
उन्होंने कहा, ‘इस बार भी मेरा नाम चुनाव में था, लेकिन टिकट किसी स्थानीय निवासी को नहीं बल्कि दूसरे वार्ड की एक महिला उम्मीदवार को मिला।’ उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता इस बात को लेकर उत्साहित थे कि वह चुनाव लड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
भाजपा के एक अन्य अनुभवी स्थानीय नेता और छह बार के पार्षद सुनील अग्रवाल भी वार्ड 14 से टिकट न मिलने के बाद आगामी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट एक महिला उम्मीदवार को दी गई।
उन्होंने कहा, ‘मेरे समर्थकों का मानना है कि अगर यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होती तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन चूंकि यह अनारक्षित थी, इसलिए उनका मानना है कि पार्टी को मुझे उम्मीदवार बनाना चाहिए था।’
इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े युवा उद्यमी और खिलाड़ी निनाद दीक्षित, महल क्षेत्र में स्थित वार्ड 22 से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, जहां संघ का मुख्यालय भी स्थित है।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश

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