मुंबई में ‘न्यूरोडाइवर्जेंट’ वयस्क कैफे चलाकर आतिथ्य सेवा की नयी मिसाल पेश कर रहे
मुंबई में 'न्यूरोडाइवर्जेंट' वयस्क कैफे चलाकर आतिथ्य सेवा की नयी मिसाल पेश कर रहे
मुंबई, 22 फरवरी (भाषा) मुंबई के एक कैफे में ‘न्यूरोडाइवर्जेंट’ वयस्क कॉफी बनाने से लेकर भंडारण प्रबंधन और रोजमर्रा के संचालन कार्य तक का जिम्मा संभालकर आतिथ्य उद्योग को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं और समावेशिता के व्यावसायिक मॉडल की मिसाल पेश कर रहे हैं।
‘कैफे अर्पण’ के एक प्रतिनिधि ने बताया कि यह कैफे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और दृश्य सहायक सामग्री का उपयोग करता है ताकि कर्मचारी रसोई के मुश्किल कार्यों को आसानी से समझ और संभाल सकें। उन्होंने कहा कि यह कैफे ‘श्रम की गरिमा’ पर विशेष जोर देता है।
‘न्यूरोडाइवर्जेंट’ का तात्पर्य ऐसे लोगों से हैं जिनका मस्तिष्क सामान्य माने जाने वाले (न्यूरोटिपिकल) मस्तिष्क से अलग तरीके से विकसित होता है या कार्य करता है। इसके अंतर्गत ‘ऑटिज्म’, ‘डिस्लेक्सिया’ और ‘अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर’ जैसी मानसिक एवं सीखने की क्षमता से जुड़ी अलग-अलग स्थितियां आती हैं।
कैफे का संचालन करने वाले ‘यश चैरिटेबल ट्रस्ट’ की संस्थापक सुषमा नागरकर ने बताया कि यहां काम करने वाले कई कर्मचारियों को आर्थिक सशक्तीकरण के अलावा एक नयी आजादी मिली है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हमारा लक्ष्य पारंपरिक ‘दान’ वाली मानसिकता से आगे बढ़ना था। हम एक ऐसा पेशेवर माहौल बनाना चाहते थे जहां हमारी टीम के सदस्यों को लाभार्थी के बजाय सक्षम कर्मचारियों के रूप में देखा जाए।’
भाषा प्रचेता सिम्मी
सिम्मी

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