महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं, विपक्षी दल अब मुख्य सचेतक भी नियुक्त नहीं कर पायेंगे

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं, विपक्षी दल अब मुख्य सचेतक भी नियुक्त नहीं कर पायेंगे

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं, विपक्षी दल अब मुख्य सचेतक भी नियुक्त नहीं कर पायेंगे
Modified Date: January 7, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: January 7, 2026 8:05 pm IST

मुंबई, सात जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र सरकार के एक नये प्रस्ताव के तहत विपक्षी दल अब विधानसभा में मुख्य सचेतक भी नियुक्त नहीं कर पायेंगे क्योंकि सदन में उनकी सख्ंया कुल सदस्य संख्या का दस फीसदी से कम है। पिछले तीन सत्र से प्रदेश विधानसभा में विपक्ष का कोई नेता भी नहीं है।

बुधवार को जारी एक संयुक्त सरकारी प्रस्ताव (जीआर) ने राज्य विधानमंडल में राजनीतिक दलों के मुख्य सचेतक एवं सचेतक के दर्जे, सुविधाओं और मानदेय को मानकीकृत कर दिया गया है।

जीआर में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मुख्य सचेतक और सचेतक नियुक्त करने के लिये राजनीतिक दलों के पास सदन की कुल संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत होना चाहिए, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा सुविधाएं मिलती हैं।

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इस बीच, अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता की नियुक्ति की विपक्षी दलों की मांग को अब तक स्वीकार नहीं किया है।

महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। सत्ताधारी गठबंधन में, भाजपा के पास 132, शिवसेना के पास 57 और राकांपा के पास 41 विधायक हैं।

विपक्षी दलों में, शिवसेना (उबाठा) के पास 20 सदस्य, कांग्रेस के पास 16 और राकांपा (शप) के पास 10 सदस्य हैं। छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों के पास बाकी सीटें हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी (2), जेएसएस (2) और कई ऐसी पार्टियां शामिल हैं जिनके पास एक-एक विधायक है।

नए नियमों के तहत, सरकार में शामिल हर पार्टी, एक मुख्य सचेतक और एक सचेतक नियुक्त करने की हकदार है।

हालांकि, विपक्ष और दूसरी पार्टियों को इसके लिए 10 प्रतिशत के आंकड़े – 29 विधायकों – को पार करना होगा, एक ऐसी शर्त जिसे अभी कोई भी विपक्षी पार्टी पूरा नहीं करती है।

संसदीय कार्य विभाग द्वारा जारी जीआर में 2018 और 2021 के पिछले आदेशों को शामिल किया गया है।

मुख्य सचेतक और सचेतक को क्रमशः कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री का प्रोटोकॉल दर्जा दिया जाता है, लेकिन उन्हें विधानसभा सत्र के दौरान सिर्फ टोकन मासिक मानदेय और सीमित सुविधाएं ही मिलती हैं।

अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई पार्टी इस अर्हता को पूरा नहीं करती है तो ये सुविधाएं तुरंत वापस ले ली जाएंगी।

कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, ‘‘यह भाजपा सरकार का आम बर्ताव है, जो विपक्षी दलों को बुनियादी शिष्टाचार से भी वंचित कर रही है।’’

भाषा रंजन रंजन नरेश

नरेश


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