‘ऑपरेशन टाइगर’ का उद्देश्य फडणवीस को नियंत्रण में रखना, परिसीमन विधेयक पारित कराना है: उद्धव
‘ऑपरेशन टाइगर’ का उद्देश्य फडणवीस को नियंत्रण में रखना, परिसीमन विधेयक पारित कराना है: उद्धव
हिंगोली (महाराष्ट्र), 27 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ‘‘नियंत्रण’’ में रखने और परिसीमन विधेयक के लिए संसद में जरूरी संख्या बल सुनिश्चित करने के मकसद से उनकी पार्टी के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल कराया गया।
मध्य महाराष्ट्र के हिंगोली में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सवाल उठाया कि स्थानीय सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने भाजपा के बजाय शिंदे की पार्टी का दामन क्यों थामा।
ठाकरे उन छह सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं जिन्होंने हाल ही में उनकी पार्टी छोड़ दी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए।
उन्होंने कहा, ‘‘जब चुनाव नहीं हो रहे थे, तब उन सांसदों को शामिल कराया गया। वे भाजपा में क्यों शामिल नहीं हुए? मुझे शक है कि यह असल में ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ है।’’
ठाकरे ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने शायद यह सब इसलिए किया ताकि ‘‘फडणवीस को एक निश्चित स्तर पर ही रखा जा सके और वह (भविष्य में) प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें।’’
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर कल जरूरत पड़ी, तो ये बागी सांसद प्रधानमंत्री पद के लिए अमित शाह को वोट देंगे।’’
ठाकरे ने आरोप लगाया कि तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ का उद्देश्य परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में मदद करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘वे परिसीमन विधेयक पारित करवाना चाहते हैं ताकि पूरा देश उत्तर भारत के हाथों में आ जाए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने किसान आत्महत्या करते हैं, कितने पेपर लीक होते हैं या कितने छात्र अपनी जान देते हैं। उन्हें तो बस सांसद चाहिए।’’
पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि मतदाताओं ने भाजपा को नकार दिया था और उन्हें (बागी सांसदों) इसलिए चुना क्योंकि वे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की विरासत से जुड़े थे।
ठाकरे ने कहा, ‘‘अगर मैंने प्रचार न किया होता, तो क्या वे जीत पाते? हमें मतदान से सिर्फ 15 दिन पहले ही अपना चुनाव चिह्न मिला था। लोगों ने भाजपा के खिलाफ वोट दिया, लेकिन उन वोटों के दम पर जीतने के बाद वे भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गए।’’
भाषा शफीक प्रशांत
प्रशांत

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