हादसे में मारे गए पायलट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लिया था हिस्सा, 10 दिन पहले परिवार से मिले थे: पिता
हादसे में मारे गए पायलट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लिया था हिस्सा, 10 दिन पहले परिवार से मिले थे: पिता
(तस्वीरों के साथ जारी)
नागपुर, छह मार्च (भाषा) असम में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान हादसे में अपने बेटे फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर को खोने वाले रवींद्र दुरागकर के पास अब उनकी यादों के सिवा कुछ नहीं बचा है। बुधवार को बेटे से फोन पर हुई आखिरी बातचीत और 10 दिन पहले परिवार के साथ बिताए आत्मीय पल ही अब उन्हें इस गहरे शोक के बीच किसी तरह संभाले हुए हैं।
भारतीय वायुसेना के अधिकारी, नागपुर के न्यू सूबेदार लेआउट में स्थित पुरवेश दुरागकर के घर उनके पिता को सांत्वना देने पहुंचे जहां गहरे शोक में डूबे रवींद्र किसी तरह खुद को संभालते और बार-बार बस यही कहते रहे कि उनके बेटे को लड़ाकू विमान उड़ाने पर बेहद गर्व था।
भारतीय वायु सेना ने शुक्रवार को बताया कि असम के कार्बी आंगलोंग जिले में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई। सुखोई-30 लड़ाकू विमान बृहस्पतिवार शाम असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ऊपर उड़ान भरते समय रडार से ओझल हो गया था।
रवींद्र ने रुंधे गले से कहा, ‘‘बुधवार को ही हमारी बात हुई थी। उसके ग्रुप कैप्टन ने हमसे संपर्क किया और हादसे की सूचना दी।’’
उन्होंने बताया कि उनके 28 वर्षीय बेटे ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हिस्सा लिया था। भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था।
उन्होंने कहा कि पुरवेश अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित था।
रवींद्र ने कहा कि पुरवेश की मूल तैनाती असम के तेजपुर में थी लेकिन तेजपुर के रनवे पर काम चलने के कारण वह जोरहाट से काम कर रहे थे।
रवींद्र के एक पड़ोसी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पुरवेश के परिवार में उनके माता-पिता और एक बहन हैं जो अमेरिका में रहती है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से पढ़ी है।
पड़ोसी ने बताया कि पुरवेश और उनकी बहन 10 दिन पहले एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए घर आए थे।
रवींद्र ने भी उस पारिवारिक कार्यक्रम को याद किया।
नागपुर में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले पुरवेश अविवाहित थे।
रवींद्र ने कहा कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर संभवत: शाम तक नागपुर लाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बेटे को भारतीय वायु सेना का हिस्सा होने पर बेहद गर्व था। वह लड़ाकू विमान उड़ाने के अपने अनुभव और भारतीय वायु सेना के विमानों की रफ्तार के बारे में कभी-कभी बात किया करता था। वह अपने सहकर्मियों का बहुत सम्मान करता था।’’
भाषा सिम्मी नरेश
नरेश

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