विमान हादसा: ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ होने पर शायद यह नहीं होता :विशेषज्ञ का दावा

विमान हादसा: ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ होने पर शायद यह नहीं होता :विशेषज्ञ का दावा

विमान हादसा: ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ होने पर शायद यह नहीं होता :विशेषज्ञ का दावा
Modified Date: January 28, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: January 28, 2026 8:19 pm IST

मुंबई, 28 जनवरी (भाषा) एक विमानन विशेषज्ञ का कहना है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत से जुड़ी बारामती विमान दुर्घटना को टाला जा सकता था, यदि हवाई अड्डे के रनवे पर एक ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ लगा होता जो कम दृश्यता में पायलट का मार्गदर्शन करता है।

विशेषज्ञ ने कहा है कि यह जरूरी है कि दुर्घटनास्थल पर मौजूद सभी साक्ष्यों को संरक्षित रखा जाए, उनके साथ छेड़छाड़ न हो, क्योंकि वे विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जा रही जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

उन्होंने कहा कि हादसे की सटीक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेगी।

सेवानिवृत पायलट एहसान खालिद ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘बारामती हवाई अड्डे पर एक छोटा सा रनवे है, लेकिन यह लियरजेट जैसे विमानों के उतरने के लिए काफी है। मुझे नहीं लगता कि रनवे का इस दुर्घटना में कोई योगदान है, क्योंकि यह दुर्घटना रनवे से पहले या बाहर हुई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तो, यह रनवे की गलती नहीं है। (लेकिन) हां, अगर रनवे पर आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) या अन्य इंस्ट्रूमेंट सिस्टम लगे होते जो कम दृश्यता की स्थिति में वे पायलट को सही मार्गदर्शन प्रदान करते, तो इस (दुर्घटना) से बचा जा सकता था।’’

उन्होंने कहा कि दृश्यता ‘मामूली’ थी, जिसका अर्थ है कि यह न तो बहुत अच्छी थी और न ही खराब लेकिन यह इतनी खराब भी नहीं थी कि मार्ग बदलने की आवश्यकता होती। उन्होंने कहा कि ‘‘इसे हम शुद्ध दृश्य उड़ान परिस्थितियां नहीं कह सकते, जैसे कि साफ आसमान।’’

खालिद ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि विमान ने उतरने का प्रयास किया और उसके बाद वह चक्कर लगाने लगा, जिसका अर्थ है कि उसने लैंडिंग को रद्द कर दिया और लैंडिंग के अपने पहले प्रयास में ही चक्कर लगा लिया।’’

उन्होंने कहा कि वैसे तो दुर्घटना का कारण जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार ‘‘इस बात का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि यह चक्कर रनवे से संपर्क न होने के कारण, खराब दृश्यता, मौसम की स्थिति या अस्थिर अप्रोच के कारण लगाया गया था।’’

खालिद ने कहा कि जहां तक ​​उन्हें पता है, बारामती हवाई अड्डे पर ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ नहीं है, इसलिए खराब दृश्यता की स्थिति में, पायलट और विमान को रनवे के साथ अपनी नजरों से ही आगे बढ़ना पड़ता है और यदि दृश्यता कम है, तो उपकरणों से बहुत कम मदद मिलती है।

पायलट सुमित कपूर को एक भद्र व्यक्ति बताते हुए खालिद ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि उस समय कॉकपिट में क्या स्थिति थी या क्या खराब मौसम के साथ कोई तकनीकी खराबी भी थी जिसने स्थिति को इतना बिगाड़ दिया कि विमान को लैंडिंग के दौरान नियंत्रित नहीं किया जा सका।’’

कपूर के पास 15,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव था और दुर्घटना के समय वह मध्यम आकार के लियरजेट 45 छोटे जेट की कमान संभाल रहे थे।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश


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