ठाणे, 17 अप्रैल (भाषा) जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद के बीच एआईएमआईएम पार्षद सहर शेख के पिता ने शुक्रवार को इसके लिए उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को दोषी ठहराया और कहा कि वह अपना पक्ष साबित करने के लिए प्रामाणिक दस्तावेज पेश करेंगे।
दो दिन पहले, ठाणे तहसीलदार कार्यालय ने मुंब्रा से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने और उसके आधार पर अपनी बेटी के लिए जाति (ओबीसी) प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी।
यह सिफारिश तहसीलदार उमेश पाटिल द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की हारी हुई प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद द्वारा दायर शिकायत की जांच के बाद आई है। अहमद ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) चुनावों के बाद सहर के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दी थी। जनवरी में हुए नगर निगम चुनावों में अहमद ठाणे के मुंब्रा में सहर से हार गए।
पत्रकारों से बात करते हुए यूनुस शेख ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र विवाद एआईएमआईएम पार्षद के विरोधियों द्वारा रचा गया था क्योंकि वे उनकी बेटी की राजनीतिक प्रगति को पचा नहीं पा रहे थे और इसलिए ऐसे उपायों का सहारा ले रहे थे।
उन्होंने कहा कि वे प्रामाणिक दस्तावेजों के साथ इस मुद्दे पर अपने रुख को साबित करेंगे।
यूनुस शेख ने कहा, “दो दिन इंतजार कीजिए और मैं सभी आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दूंगा।”
उन्होंने कहा कि तहसीलदार ने केवल रिपोर्ट दी है, प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया है।
इस बीच, सहर शेख ने बृहस्पतिवार रात को सोशल मीडिया पर एक संदेश “गेम ओवर” पोस्ट किया, जब वह दक्षिण मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आईपीएल मैच देखते नजर आयी थीं।
उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) को 25 मार्च को सौंपी गई तहसीलदार की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि यूनुस शेख ने प्रथम दृष्टया राज्य चुनाव आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया था।
इसमें कहा गया है कि उनका 2011 का ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था, उसमें एसडीओ के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे, और उसके शीर्षक से “महाराष्ट्र राज्य” शब्द गायब था।
अधिकारियों को पता चला कि शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे। महाराष्ट्र जाति प्रमाण पत्र अधिनियम, 2000 के तहत, प्रवासियों को फॉर्म-10 प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। आरोप है कि शेख ने फॉर्म-8 के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया, जो कि स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने 2018 में उनके स्वयं के “प्रथम दृष्टया फर्जी” प्रमाण पत्र का उपयोग करके सहर शेख के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। परिवार हालांकि ठाणे में रहता था, लेकिन सहर शेख का प्रमाण पत्र मुंबई शहर के कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त किया गया था।
तहसीलदार ने सभी ऐसे प्रमाणपत्रों को तत्काल रद्द करने और यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की।
भाषा
प्रशांत नरेश
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