ठाणे, 31 मई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे की एक विशेष अदालत ने वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों की तस्करी करने के मामले में तीन आरोपी महिलाओं को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष मामले के मुख्य छद्म ग्राहक और नाबालिगों की गवाही दिलाने में विफल रहा।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) एस. पी. अग्रवाल ने शर्मिनबानू उर्फ जीनत यूनुस सिद्दीकी (36), रिजवाना जावेद खान (27) और अफसाना उर्फ मुस्कान अनीस शेख (25) को 29 मई के अपने आदेश में बरी कर दिया। उन पर भारतीय दंड संहिता, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आरोप लगाये गए थे।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पुलिस ने ठाणे के पास मुंब्रा स्थित एक फ्लैट से संचालित वेश्यावृत्ति गिरोह का पर्दाफाश उस वक्त किया जब एक छद्म ग्राहक को मौके पर भेजा गया। पुलिस के पहुंचने पर वह ग्राहक 17 वर्षीय एक लड़की से मिला, जिसे कथित तौर पर वेश्यावृत्ति में धकेल दिया गया था।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि फ्लैट से और भी लड़कियों को मुक्त कराया गया और कहा कि इस अवैध गतिविधि में कथित संलिप्तता के लिए प्राथमिकी में तीन महिलाओं को नामजद किया गया था।
हालांकि, अदालत ने गौर किया कि न तो स्वतंत्र गवाहों, न ही लड़कियों और न ही छद्म ग्राहक ने मुकदमे के दौरान गवाही दी।
न्यायाधीश ने केवल छद्म ग्राहक के साक्ष्य पर भरोसा करने से इनकार कर दिया।
न्यायाधीश ने इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि अभियोजन पक्ष ‘सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा’, उन्हें बरी कर दिया।
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शुभम सुभाष
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