पुणे इमारत हादसा: 72 घंटे बाद भी मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
पुणे इमारत हादसा: 72 घंटे बाद भी मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
पुणे, 11 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे शहर के पास मोशी में तीन मंजिला एक इमारत पर कचरे का विशाल ढेर गिरने के करीब 72 घंटे बाद भी राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। इस बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण अभियान में बचाव दल ने इमारत की ऊपरी कंक्रीट की छत को लगभग तोड़ दिया है, ताकि मलबे के नीचे दबे बताए जा रहे आठ लोगों तक पहुंचा जा सके।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में आधुनिक क्रेन और विशेष रूप से कंक्रीट तोड़ने वाली मशीनों सहित करीब 15 खुदाई उपकरणों को लगाया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मलबे में दबे लोगों के परिजनों का सब्र अब जवाब दे रहा है और वहां माहौल बेहद भावुक बना हुआ है। इन सबके बीच एनडीआरएफ शनिवार देर रात तक इस बचाव अभियान को पूरा करने की हरसंभव कोशिश कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, इमारत बहुत ही अजीब तरीके से ढही है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘केंटिलीवर कोलैप्स’ कहते हैं। इसका मतलब यह है कि इमारत का एक हिस्सा गिरने की वजह से छतें ताश के पत्तों की तरह एक-दूसरे पर सपाट नहीं गिरी हैं, बल्कि बीच में ही तिरछी होकर हवा में लटक गई हैं। इसके अलावा, ढही हुई बिल्डिंग के चारों तरफ कचरे और मलबे का बड़ा ढेर लगा है, जिसकी वजह से राहत काम में लगी भारी मशीनों को अंदर ले जाने और चलाने के लिए जगह बहुत कम बची है।
पिंपरी-चिंचवड़ औद्योगिक नगर क्षेत्र के मोशी में कचरे से बिजली बनाने वाले कारखाने के ऊपर बनी एक तीन मंजिला इमारत बुधवार दोपहर को उस समय ढह गई थी, जब पुराने कचरे के ढेर का एक बड़ा हिस्सा उस पर आ गिरा। इस हादसे में करीब 18 लोग मलबे के नीचे दब गए थे।
बचाव अभियान शुरू होने के बाद से अब तक नौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि एक व्यक्ति का शव मलबे से बरामद हुआ है। पिछले दो दिनों से किसी भी व्यक्ति के जीवित बाहर न आने के कारण फंसे हुए लोगों के रिश्तेदार प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं और बचाव कार्य की रफ्तार को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
अभियान में आ रही तकनीकी दिक्कतों का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने कहा कि राहत कार्य इस समय बेहद नाजुक मोड़ पर है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बचाव दल को सबसे पहले क्षतिग्रस्त इमारत के उन हिस्सों को हटाना पड़ रहा है जो बेहद अस्थिर हैं और कभी भी गिर सकते हैं, ताकि उन मंजिलों तक सुरक्षित रास्ता बनाया जा सके जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है।
पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने कहा, ‘एनडीआरएफ और अन्य विभागों की टीमें लगातार काम में जुटी हैं। ऊपरी छत को लगभग तोड़ दिया गया है और वहां से मलबा हटाया जा रहा है। इसके तुरंत बाद निचली छत को तोड़ने का काम शुरू होगा। हम मलबे में फंसे आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।’
परिजनों द्वारा काम में देरी के आरोपों पर आयुक्त ने कहा कि बचाव कार्य में ‘बिलकुल भी देरी’ नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘एनडीआरएफ अपने लंबे अनुभव और तय नियमों के अनुसार बेहद व्यवस्थित और पूरी तेजी से काम कर रही है।’
चुनौतियों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि इमारत ‘केंटिलीवर फॉल’ का शिकार हुई है, जिससे आगे की दो-तीन छतें एक-दूसरे के ऊपर आकर गिर गईं। माना जा रहा है कि फंसे हुए लोग इसी अग्रिम हिस्से में हैं। इन छतों को बहुत सावधानी से हटाना होगा ताकि अंदर फंसे लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे, और इसी वजह से इस काम में समय लग रहा है।
भाषा सुमित पवनेश
पवनेश

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