पुणे, 14 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बुधवार को अपने सहयोगी दलों को निशाने पर लेते हुए सनसनीखेज दावा किया कि 1990 के दशक में शिवसेना–भाजपा की पहली सरकार के दौरान पुणे की एक सिंचाई परियोजना की लागत “पार्टी फंड” जुटाने के लिए बढ़ाई गई थी।
वित्त विभाग संभाल रहे पवार ने कहा कि इस मामले से जुड़े दस्तावेज अब भी उनके पास मौजूद हैं।
भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के साथ राज्य सरकार में सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में नगर निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ने के बीच, मतदान की पूर्व संध्या पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह दावा किया।
इन चुनावों के प्रचार के दौरान राकांपा और भाजपा एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही हैं।
पवार ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र कृष्णा घाटी विकास परियोजना के अंतर्गत आने वाली पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना की अनुमानित लागत शिवसेना-भाजपा की पहली ‘युति’ सरकार के दौरान बढ़ाकर 330 करोड़ रुपये कर दी गई थी। अविभाजित शिवसेना और भाजपा ने वर्ष 1995 से 1999 तक पहली बार राज्य की सत्ता संभाली थी।
राकांपा प्रमुख ने कहा, “जब हम सत्ता में आए, तो मैंने इस योजना को रद्द कर दिया। कुछ अधिकारियों ने मुझे अनियमितताओं की जानकारी दी, जिसके बाद मैंने नए सिरे से लागत का आकलन कराने के निर्देश दिए। संशोधित अनुमान 230 करोड़ रुपये आया।”
पवार ने दावा किया कि जब उन्होंने लागत बढ़ने को लेकर अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि पार्टी फंड जुटाने के लिए 100 करोड़ रुपये जोड़े गए थे।
पवार ने आरोप लगाया, “उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों के लिए अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये जोड़े गए, जिससे कुल लागत 330 करोड़ रुपये हो गई।”
पवार ने कहा कि उन्होंने इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया लेकिन संबंधित फाइल आज भी उनके पास है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व में कांग्रेस-राकांपा सरकार के दौरान कथित 70 हजार करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले को लेकर अजित पवार पर निशाना साधती रही है।
पवार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने कहा कि उन्हें पहेलियों में बात नहीं करनी चाहिए।
राउत ने कहा, “अगर हिम्मत है तो पूरी जानकारी सार्वजनिक करें।”
उन्होंने इन आरोपों को ‘ब्लैकमेलिंग’ का तरीका करार दिया।
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राखी प्रशांत
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