पुणे पोर्श दुर्घटना मामला: किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों के लिए होगा कार्यशालाओं का आयोजन

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पुणे पोर्श दुर्घटना मामला: किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों के लिए होगा कार्यशालाओं का आयोजन

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  • Publish Date - May 31, 2024 / 07:50 PM IST,
    Updated On - May 31, 2024 / 07:50 PM IST

पुणे, 31 मई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के सदस्यों को किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के प्रति और संवेदनशील बनाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करेगा।

पुणे पोर्श कार हादसे मामले में मुख्य आरोपी को जमानत देने के फैसले के बाद जेजेबी की चौतरफा हो रही आलोचना के बाद यह पहल की गई है।

पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई को नाबालिग चालक द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही पोर्श कार ने मोटरसाइकिल से जा रहे दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गयी थी। पुलिस ने दावा किया कि वह नशे की हालत में कार चला रहा था।

इस मामले में आरोपी नाबालिग को जमानत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) ने किशोर न्याय बोर्ड के आचरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। प्रत्येक जिले में तीन सदस्यीय किशोर न्याय बोर्ड होता है। बोर्ड के दो सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है, जबकि एक सदस्य न्यायपालिका से होता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त डॉ. प्रशांत नारनवरे ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘इस घटना के बाद, हमने जेजेबी सदस्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मैंने पांच जिलों का दौरा किया है, जिनमें नासिक, अहमदनगर, नांदेड़, सोलापुर और अकोला शामिल हैं। मैंने राज्य सरकार द्वारा नियुक्त जेजेबी सदस्यों से मुलाकात की और किशोर न्याय अधिनियम तथा इसके प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में परामर्श सत्र आयोजित किए। ’’

नारनवरे ने कहा, ‘‘महिला एवं बाल विकास विभाग ने किशोर न्याय अधिनियम के संबंध में पाठ्यक्रम तैयार किया है, जो जेजेबी सदस्यों के लिए मार्गदर्शक का काम करेगा। अगले महीने से हम महात्मा गांधी प्रशिक्षण संस्थान (एमजीटीआई) के सहयोग से जेजेबी और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण सत्र शुरू करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि जेजेबी और सीडब्ल्यूसी सदस्यों की भूमिका दोहरी है, एक न्यायिक पहलू से संबंधित है और दूसरी पुनर्वास से संबंधित है।

डब्ल्यूसीडी के आयुक्त ने कहा, ‘‘ सभी सदस्य अपनी भूमिकाएं जानते हैं, लेकिन इस संवेदीकरण कार्यक्रम के माध्यम से, हम एक बार फिर कानूनी ढांचे के भीतर उनकी भूमिकाओं की समीक्षा करेंगे और स्पष्ट करेंगे कि विशिष्ट परिस्थितियों में उन्हें क्या करना चाहिए। जिलाधिकारी और प्रधान जिला न्यायाधीश (पीडीजे) अपने-अपने जिलों में जेजेबी की निगरानी करते हैं। हम उनसे मासिक और त्रैमासिक आधार पर जेजेबी की समीक्षा करने का अनुरोध कर रहे हैं।’’

भाषा रवि कांत प्रशांत

प्रशांत