राम मंदिर चढावा चोरी विवाद: न्यास के कोषाध्यक्ष ने कहा, इस्तीफा नहीं देंगे

राम मंदिर चढावा चोरी विवाद: न्यास के कोषाध्यक्ष ने कहा, इस्तीफा नहीं देंगे

राम मंदिर चढावा चोरी विवाद: न्यास के कोषाध्यक्ष ने कहा, इस्तीफा नहीं देंगे
Modified Date: July 14, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: July 14, 2026 5:46 pm IST

पुणे, 14 जुलाई (भाषा) श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने मंगलवार को स्वीकार किया कि अयोध्या के राम मंदिर में निगरानी व्यवस्था में कुछ चूक हुई, लेकिन उन्होंने कहा कि चढ़ावे की चोरी के मामले में इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि वह खुद को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं मानते।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों को उनकी पृष्ठभूमि और पात्रता की समुचित जांच करनी चाहिए थी तथा उन्हें अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी।

चोरी की रकम के बारे में पूछे जाने पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुमान के अनुसार यह राशि करीब तीन करोड़ रुपये हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे आधिकारिक या प्रामाणिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच और उच्चतम न्यायालय की ओर से मामले की निगरानी से संतुष्ट हैं।

गोविंद गिरि महाराज ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफा संबंधी खबरें दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं इस्तीफा दूंगा। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं और मैं भागने वालों में से नहीं हूं। जब समय संघर्ष का हो, तब मैदान छोड़कर भागना हमारे धर्म में नहीं है।’’

न्यास के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘न्यास के संविधान के अनुसार, एक बार इस्तीफा सौंपे जाने के बाद, उसे मंजूर हुआ मान लिया जाता है।’’

उन्होंने उन चर्चाओं को भी खारिज किया कि चंपत राय को बलि का बकरा बनाया गया। उन्होंने कहा कि चंपत राय की लापरवाही की वजह से यह स्थिति बनी और इस्तीफा देने से पहले उन्हें इसका एहसास हो गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘कोषाध्यक्ष के तौर पर मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां हैं। मेरा काम न्यास के बैंक खातों में जमा कोष की देखरेख करना है। पांच चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमित रूप से इन खातों की जांच करते हैं।’’

गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि मंदिर की दान पेटियों में जमा रकम का गबन किया गया, न कि न्यास के बैंक खातों में जमा रकम का।

उन्होंने कहा कि स्थानीय न्यासी दान पेटियों में जमा रकम की गिनती और हिसाब-किताब का काम देखते थे।

गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि दान पेटियों से मिलने वाले दान के प्रबंधन और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी एसबीआई को सौंपी गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, वे सभी एसबीआई के कर्मचारी हैं। उन्हें एसबीआई ने ही तैनात किया था, न्यास ने नहीं। भले ही कुछ नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर की गई हों, लेकिन संबंधित लोगों की पृष्ठभूमि और पात्रता की जांच करना एसबीआई की जिम्मेदारी थी। एसबीआई देश के अग्रणी बैंक में से एक है।’’

उन्होंने कहा कि न्यास को उम्मीद थी कि बैंक वित्तीय अनुशासन बनाए रखेगा और चढावे के रोजाना के हिसाब-किताब की देखरेख के लिए खास तौर पर कर्मचारी तैनात करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि न्यासियों के पास वित्तीय मामलों की जानकारी न हो, लेकिन बैंक अधिकारियों के पास तो होती है।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या बैंक कर्मचारियों को ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए था, गोविंद गिरि महाराज ने कहा, ‘‘वे उपदेशक नहीं हैं, वे बैंक अधिकारी हैं। इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए था।’’

उन्होंने कहा कि न्यास की प्राथमिकता अब व्यवस्था को मजबूत करना और कमियों को दूर करना है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने यह भी कहा कि न्यास एसआईटी की जांच में दखल नहीं देगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कथित चोरी ‘‘भगवान राम के खिलाफ एक अपराध’’ थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम शर्मिंदा हैं कि ऐसी घटना हुई। यह हमारे लिए बहुत दुख की बात है।’’

कोषाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की मांगों पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि प्रायश्चित के तौर पर इस्तीफा देने की ‘‘बिल्कुल भी जरूरत नहीं’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं है। बल्कि यह पक्का करना है कि जो गलतियां हुईं, वे दोबारा न हों। हमने खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।’’

उन्होंने बताया कि न्यास ने कई सुधारात्मक उपाय लागू किए हैं, जिनमें नकदी संभालने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली वर्दी अनिवार्य करना, सीसीटीवी के दायरे में सभी स्थान को लाना, नोट के बंडल छिपाने की आशंका रोकने के लिए मेज की बजाय फर्श पर बिछी चटाई पर नकदी की गिनती करना, नकदी की गिनती के दौरान न्यास के दो प्रतिनिधियों और एसबीआई के दो अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले सभी कर्मचारियों की तलाशी लेना शामिल है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कोषाध्यक्ष के तौर पर नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, तो गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से खुद को दोषी नहीं मानते, लेकिन जिम्मेदारी का दायित्व मानते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि मेरी कोई गलती है। लेकिन चूंकि मेरा नाम कोषाध्यक्ष के पद से जुड़ा है, इसलिए मुझे इस बात का गहरा अफसोस है कि ऐसा हुआ।’’

सोने समेत दान में मिली चीजों के गायब होने संबंधी आरोपों पर उन्होंने कहा कि कई खबरों में इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि 1,400 करोड़ रुपये मूल्य का चढावा गायब होने संबंधी खबरें पूरी तरह झूठी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सब बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। इतना सोना कौन दान करता है?’’

उन्होंने बताया कि न्यास ने चढावे में मिली 2,926 कीमती चीजों का रजिस्टर मीडिया के सामने दिखाया और दान करने वालों को यह जांचने के लिए बुलाया कि उनकी दी हुई चीजें सुरक्षित हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि न्यास फिलहाल इस मुद्दे पर कोई ‘‘श्वेत पत्र’’ जारी नहीं करेगा, क्योंकि एसआईटी पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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