एनसीपीआई में विलय के बाद तृणमूल कांग्रेस पर बागी सांसदों का दावा खत्म: संजय राउत

एनसीपीआई में विलय के बाद तृणमूल कांग्रेस पर बागी सांसदों का दावा खत्म: संजय राउत

एनसीपीआई में विलय के बाद तृणमूल कांग्रेस पर बागी सांसदों का दावा खत्म: संजय राउत
Modified Date: June 15, 2026 / 07:23 pm IST
Published Date: June 15, 2026 7:23 pm IST

मुंबई, 15 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने सोमवार को कहा कि ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में अपना विलय करने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का अब उनकी मूल पार्टी पर कोई दावा नहीं रह गया है।

बागी गुट से ताल्लुक रखने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार को कहा था कि वे मूल तृणमूल के रूप में मान्यता प्राप्त करने और पार्टी के चुनाव चिह्न को हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

वर्ष 2022 में पार्टी में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हाथों अपनी मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न गंवा चुके गुट के नेता राउत ने कहा, ‘(दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए) एनसीपीआई में विलय ही बागी सांसदों के पास एकमात्र विकल्प था। इसलिए अब तृणमूल और उसके चुनाव चिह्न पर उनका दावा पूरी तरह खत्म हो चुका है।’

राउत ने कहा कि बागी सांसदों ने एनसीपीआई के साथ विलय का फैसला तब किया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा स्थित इस अल्पचर्चित संगठन के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा, एनसीपीआई जैसी पार्टियां बना रही है और विपक्ष के सांसदों को उसमें इस तरह धकेल रही है ‘जैसे वे गुलाम हों।’

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की यह जंग संसद और पश्चिम बंगाल विधानसभा दोनों जगह एक साथ लड़ी जा रही है।

भाषा

सुमित सुरेश

सुरेश


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