मराठा आरक्षण आंदोलन का दूसरा दिन : जरांगे कुनबी प्रमाणपत्र की मांग पर अड़े, मुंबई मार्च की चेतावनी

मराठा आरक्षण आंदोलन का दूसरा दिन : जरांगे कुनबी प्रमाणपत्र की मांग पर अड़े, मुंबई मार्च की चेतावनी

मराठा आरक्षण आंदोलन का दूसरा दिन : जरांगे कुनबी प्रमाणपत्र की मांग पर अड़े, मुंबई मार्च की चेतावनी
Modified Date: August 30, 2026 / 12:13 pm IST
Published Date: August 30, 2026 12:13 pm IST

जालना (महाराष्ट्र), 30 अगस्त (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे अपने अनिश्चितकालीन अनशन के दूसरे दिन रविवार को अपनी इस मांग पर अड़े रहे कि सभी मराठों को कुनबी जाति के प्रमाणपत्र दिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो वह मुंबई तक मार्च करेंगे।

जरांगे ने शनिवार को जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर अपना 11वां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनके आंदोलन के समर्थन में समुदाय के हजारों लोग वहां जुटे हैं।

जरांगे की मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषक समुदाय है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है।

अपने आंदोलन के दूसरे दिन पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सरकार को सभी मराठों को कुनबी घोषित करना चाहिए।’’

जरांगे ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वह मुंबई तक मार्च करेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे।

उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में मराठा समुदाय की कोर कमेटी की बैठक 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में होगी, जिसमें मुंबई में भूख हड़ताल करने को लेकर फैसला लिया जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘अगर सरकार 12 सितंबर तक हमारी मांगें मान लेती है तो मुंबई में प्रस्तावित अनशन करने की कोई जरूरत नहीं होगी।’’

जरांगे की मांग है कि मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को 58 लाख ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि समुदाय अब इसके लिए और समय देने को तैयार नहीं है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन रोक दिया जाए, क्योंकि जिन मामलों में ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उनमें सत्यापन की कोई जरूरत नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने राज्य सरकार से सातारा गजट के आधार पर आरक्षण देने, पूरे महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लेने और पिछले आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा देने की भी मांग की है।

इस बीच, मराठा क्रांति मोर्चा के राज्य समन्वयक डॉ. संजय लाखे पाटिल ने दावा किया कि महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने सुझाव दिया है कि जाति सत्यापन समितियों की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के अन्य हिस्सों में ऐसी समितियां मौजूद नहीं हैं।

लाखे पाटिल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इससे मराठा युवाओं और अन्य समुदायों के लोगों में भ्रम और नाराजगी पैदा हो सकती है।

उन्होंने इस कथित सुझाव को ‘‘चौंकाने वाला, असंवैधानिक और गैरकानूनी’’ बताते हुए कहा कि जाति जांच समितियों की व्यवस्था केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें जाति और जनजाति प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए स्वतंत्र जांच समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए थे।

उन्होंने कहा कि सत्यापन व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाकर आरक्षण का गलत लाभ उठाने से रोकना और आरक्षण का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाना है।

लाखे पाटिल ने चेतावनी दी कि जाति सत्यापन समितियों को खत्म करने की किसी भी कोशिश को कानूनी चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विभिन्न जातियों और जनजातियों के आरक्षण अधिकारों से जुड़ा है और केवल मराठा समुदाय तक सीमित नहीं है।

राज्य सरकार ने 25 अगस्त को मराठा समुदाय के कुनबी रिकॉर्ड की जांच करने वाली समिति का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था।

25 अगस्त को जारी सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति का कार्यकाल अब 30 जून 2027 तक बढ़ा दिया गया है, जो 30 जून 2026 को समाप्त हो गया था।

यह बहु-सदस्यीय समिति सितंबर 2023 में गठित की गई थी। इसका उद्देश्य मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तय करना था, ताकि वे ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ ले सकें।

सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ जिलों में मराठा-कुनबी वंशावली का पता लगाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए समिति को अपना काम पूरा करने के लिए और समय देना जरूरी था।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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