अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो मुंबई में शिवसेना (उबाठा) अपना महापौर बनाएगी : उद्धव ठाकरे

अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो मुंबई में शिवसेना (उबाठा) अपना महापौर बनाएगी : उद्धव ठाकरे

अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो मुंबई में शिवसेना (उबाठा) अपना महापौर बनाएगी : उद्धव ठाकरे
Modified Date: January 17, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: January 17, 2026 8:31 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

मुंबई, 17 जनवरी (भाषा) शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो पार्टी मुंबई में अपना महापौर नियुक्त करने में सफल हो सकती है।

ठाकरे की यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गठबंधन द्वारा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में शानदार जीत मिलने के एक दिन बाद आई है। बीएमसी पर गत ढाई दशक से अविभाजित शिवसेना का शासन था।

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यह कूट टिप्पणी इस अनिश्चितता के बीच आई है कि आखिर महापौर पद किसके पास जाएगा, भाजपा या शिवसेना के।

ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कहा कि मुंबई में शिवसेना (उबाठा) का महापौर बनाना उनका सपना है, और अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो यह सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह गलतफहमी है कि उसने शिवसेना (उबाठा) को खत्म कर दिया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री की पार्टी ने 227-सदस्यीय नगर निकाय में 65 सीट जीती हैं, जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से 29 अधिक हैं।

ठाकरे ने कहा, ‘‘शिवसेना को भाजपा जमीनी स्तर पर खत्म नहीं कर सकी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निष्ठा खरीदने के लिए ‘साम, दाम, दंड, भेद’ का इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘उसने (भाजपा ने) मुंबई को गिरवी रखकर विश्वासघात के जरिये जीत हासिल की है। मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेंगे। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब शुरू हुई है।’’

करीब तीन साल पहले मौजूदा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अविभाजित शिवसेना के ठाकरे नेतृत्व से बगावत कर दी थी और पार्टी को विभाजित कर दिया था।

उद्धव ठाकरे ने परोक्ष रूप से शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘देशद्रोहियों को सोचना चाहिए कि उन्होंने कितना बड़ा पाप किया है।’’

शिवसेना (उबाठा) अध्यक्ष ने बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा कागजों पर एक पार्टी है, न कि ‘‘सड़कों पर’’, अन्यथा उसे अन्य दलों को तोड़ने, चुनावों में मिटाने योग्य स्याही का उपयोग करने और राज्य के तंत्र का दुरुपयोग करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

मतदान के दिन उस समय विवाद खड़ा हो गया जब विपक्षी दलों ने दावा किया कि मतदाताओं की उंगलियों पर पहचान के लिए ‘मार्कर पेन’ से निशान लगाए जा रहे हैं और उसे आसानी से मिटाया जा सकता है।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को पैसों का लालच दिया गया और उन्हें धमकाया गया, भाजपा ने उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने कहा कि शिवसेना (उबाठा), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पार्षद यह खुलासा करेंगे कि बीएमसी को कैसे लूटा गया और यह सुनिश्चित करेंगे कि ‘‘मुंबईकरों’’ से संबंधित भूमि का उपयोग केवल उनके कल्याण के लिए किया जाए।

विपक्षी गठबंधन के चुनावी प्रदर्शन पर ठाकरे ने कहा, ‘‘‘मेरी मानसिकता हारने वाले की नहीं है। हमने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया है।’’

बीएमसी के 227-सदस्यीय सदन में भाजपा ने 89 सीट जीतीं हैं, जबकि सहयोगी शिवसेना ने 29 सीट अपने नाम की है। वहीं, शिवसेना (उबाठा) को 65 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीट मिलीं। वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीट, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को आठ, अजित पवार-नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और शरद पवार नीत राकांपा (शप) को एक सीट मिली है।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश


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