छात्र ने एससी/एसटी प्रकोष्ठ में कोई शिकायत नहीं की थी: आईआईटी मुंबई के फैकल्टी सदस्य
छात्र ने एससी/एसटी प्रकोष्ठ में कोई शिकायत नहीं की थी: आईआईटी मुंबई के फैकल्टी सदस्य
मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मुंबई के फैकल्टी फोरम अध्यक्ष डॉ. राजकुमार पंत ने दावा किया कि पिछले सप्ताह कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्र साहिल वाकोडे ने हाल के दिनों में संस्थान के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ में कोई शिकायत नहीं की थी।
उनकी यह टिप्पणी वाकोडे के परिवार द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि छात्र संस्थान के व्यवस्थागत उत्पीड़न का शिकार हुआ और उसके साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया गया।
डॉ. पंत ने अपने सहकर्मी सूर्यनारायण डूला का भी बचाव किया, जिन्हें प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि डूला आम तौर पर छात्रों की मदद करते थे और वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो किसी को प्रताड़ित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों में स्पष्ट रूप से नकल पर रोक है और सुविधाओं के दुरुपयोग की अनदेखी करना उन छात्रों के साथ अन्याय होगा, जो नियमों का पालन करते हैं।
आईआईटी मुंबई ने सोमवार को छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा वाकोडे की आत्महत्या को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों के बाद डूला को प्रशासनिक मामलों के डीन पद से हटा दिया था। छात्र की मौत के बाद डूला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र 22 वर्षीय वाकोडे को 18 सितंबर की शाम पवई परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका पाया गया था। यह घटना ‘मिड-सेमेस्टर’ परीक्षा के दौरान उसे चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
मुंबई पुलिस ने वाकोडे के परिवार की शिकायत के आधार पर डूला के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया है।
डॉ. पंत ने कहा कि अन्य संस्थानों की तरह आईआईटी मुंबई में भी इस वर्ग के छात्रों के कल्याण के लिए एक समर्पित एससी/एसटी प्रकोष्ठ है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस बारे में संस्थान के उप निदेशक प्रोफेसर रवींद्र गुड़ी से बात की और उन्होंने मुझे बताया कि एससी/एसटी प्रकोष्ठ ने एक नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि पिछले तीन-चार महीनों में साहिल वाकोडे द्वारा प्रकोष्ठ से संपर्क करने की कतई कोई कोशिश नहीं की गई थी। उनके द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं करायी गई थी, औपचारिक शिकायत की तो बात ही छोड़िए; उन्होंने किसी भी मामले में एससी/एसटी प्रकोष्ठ से संपर्क तक नहीं किया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा केवल इतना कहना है कि हम शिक्षक हैं और संस्थान द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या डूला ने वाकोडे को प्रताड़ित किया था, डॉ. पंत ने कहा कि उनके सहकर्मी इससे पहले छात्र मामलों के डीन के पद पर भी रह चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यह सोचना ठीक नहीं है कि छात्रों की मदद करने के लिए पहचाना जाने वाला उनके जैसे व्यक्ति ऐसा करेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं, जहां किसी को सख्ती से कार्रवाई करनी पड़ती है और उन्होंने नियमों के अनुसार सख्ती से कार्रवाई की। लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त हूं कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो इस तरह के कृत्यों में शामिल हों… मुझे इस दावे में कोई दम नहीं दिखता।’’
डॉ. पंत ने यह भी कहा कि समाज और संस्थान के नियम स्पष्ट करते हैं कि नकल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अब, अगर कोई शिक्षक किसी को सुविधाओं का दुरुपयोग करते और अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते हुए देखता है, तो कोई कार्रवाई न करना उन अधिकांश छात्रों के साथ अन्याय होगा, जो नकल नहीं करते।’’
डॉ. पंत ने कहा कि वह सामने आई खबरों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज है और कानून अपना काम करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि मुंबई अपराध शाखा इसकी जांच कर रही है, इसलिए इस मामले पर हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।’’
भाषा गोला नरेश
नरेश

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