पीएफबीआर के मामले में मिली सफलता ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने की दिशा में कदम: विशेषज्ञ

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पीएफबीआर के मामले में मिली सफलता ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने की दिशा में कदम: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 08:32 PM IST

मुंबई, सात अप्रैल (भाषा) परमाणु क्षेत्र के विशेषज्ञों ने मंगलवार को भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल करने की सराहना करते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि बहुत कम देशों ने इस प्रौद्योगिकी में महारत हासिल की है।

परमाणु रिएक्टर में ‘क्रिटिकैलिटी’ नाभिकीय श्रृंखला प्रतिक्रिया की वह स्थिर, स्व-पोषक अवस्था है, जिसमें न्यूट्रॉन उत्पादन न्यूट्रॉन हानि को संतुलित करता है, जिससे नियंत्रित मात्रा में विद्युत उत्पादन संभव हो पाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अगला कदम इस प्रौद्योगिकी को और अधिक ‘‘बेहतर’’ बनाने के अलावा और भी फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का निर्माण करना होना चाहिए।

भारत के 500 मेगावाट के पीएफबीआर ने 6 अप्रैल को सफलतापूर्वक प्रथम ‘क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त कर ली। परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, पीएफबीआर का प्रौद्योगिकी विकास और डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, इसके अनुसंधान एवं विकास केंद्र द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया था।

परमाणु ऊर्जा विभाग के पूर्व सचिव अनिल काकोदकर ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह ‘‘ऐतिहासिक’’ घटनाक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन के लिए अन्य देशों पर भारत की निर्भरता को देखते हुए, यह कदम विशेष रूप से ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम एशिया संकट ने तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।

काकोदकर ने कहा कि अन्य परमाणु रिएक्टरों के विपरीत, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर न केवल ऊर्जा का उत्पादन करता है बल्कि ईंधन का भी उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि इसलिए इसे ‘ब्रीडर रिएक्टर’ कहा जाता है।

परमाणु ऊर्जा विभाग के पूर्व सचिव के.एन. व्यास ने कहा कि यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक बेहद उन्नत है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि रिएक्टर तुरंत बिजली उत्पादन शुरू नहीं करेगा और कई तरह के परीक्षणों से गुजरेगा।

व्यास ने कहा कि फ्रांस और अमेरिका जैसे देश अपने ब्रीडर रिएक्टरों को बड़े पैमाने पर बढ़ाने में असमर्थ रहे हैं।

व्यास की बात से सहमति जताते हुए काकोदकर ने कहा कि रूस के बाद, जो 600 मेगावाट और 800 मेगावाट क्षमता के दो ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला एकमात्र देश है, भारत 500 मेगावाट क्षमता का रिएक्टर विकसित करने वाला एकमात्र देश है।

उन्होंने कहा कि फ्रांस और अमेरिका भी ब्रीडर रिएक्टर संचालित करते हैं, लेकिन इस पैमाने पर नहीं।

कैनबरा स्थित ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रेजिडेंट सीनियर फेलो राजेश्वरी राजगोपालन ने कहा कि अत्यधिक विलंब के बावजूद यह विकास सराहनीय है।

काकोदकर ने कहा कि जिस तरह ‘दाबित भारी जल रिएक्टर’ प्रौद्योगिकी के मामले में भारतीय वैज्ञानिकों ने दशकों में महारत हासिल की है और परमाणु संयंत्रों के निर्माण में तेजी लाई है, उसी तरह अगला कदम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को और अधिक मजबूत बनाना और रिएक्टर का विस्तार करना होगा।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश