DR Charandas Mahat Letter to President Murmu || Image- DR CD Mahant Instagram
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर राज्य सरकार की शिकायत की है। (DR Charandas Mahat Letter to President Murmu) उन्होंने अपने पत्र के जरिये दवा किया है कि, राज्य में वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े
डॉ महंत के मुताबिक़ राज्य के वन्य क्षेत्र में निवासरत 50 हजार से ज्यादा आदिवासी परिवारों को उनके कानूनी हक से वंचित किया जा रहा है। डॉ महंत ने राष्ट्रपति से राज्य में वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(घ) को तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग की है।
डॉ चरणदास महंत ने लिखा है कि, “अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006” (जिसे आगे केवल वन अधिकार अधिनियम कहा जायेगा) है सम्पूर्ण दिसंबर 2007 से प्रभावशील है। (DR Charandas Mahat Letter to President Murmu) इस अधिनियम की धारा 3(1)(क) के अनुसार वन भूमि पर स्थित जलाशयों में मत्स्य और जलाशयों के अन्य उत्पाद के उपयोग या उस पर हकदारी के सामुदायिक अधिकार पात्र व्यक्तियों को दिये जाने चाहिए। परन्तु छत्तीसगढ़ राज्य में इस प्रावधान का क्रियान्वयन 18 वर्षों में भी नहीं किया जा सका है।”
डॉ महंत ने अपने पत्र में बताया है कि, “छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 1,58,000 हेक्टेयर जलक्षेत्र वन भूमि पर स्थित हैं। इन जलाशयों में मछली पालन तथा मत्स्याखेट करके 50,000 से अधिक अनुसूचित जनजाति और अन्य वन निवासी परिवार जीवन यापन करते हैं। छत्तीसगढ़ शासन की “मछली नीति” में वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का ध्यान नहीं रखा गया है बल्कि उसके विपरीत प्रावधान हैं। जिसके कारण वन भूमि पर स्थित जलक्षेत्र वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करते हुए पट्टे पर और 1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशय निविदाएं आमंत्रित करके पट्टे दिये जाते हैं। बड़े जलाशयों में, अनुसूचित जनजाति और अन्य वन निवासी व्यक्ति ठेकेदारों के मजदूर तौर पर कार्य करते हैं। जबकि वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वन भूमि पर स्थित जलक्षेत्रों का सामुदायिक अधिकार दिया जाना चाहिए।”
IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे Instagram Page को Follow करें
उन्होंने पत्र में अनुरोध किया है कि, “वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(घ) को तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित करवाने के लिये छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय को निर्देशित करने की महान कृपा करेंगे।”
रक्षा सचिव ने सिंगापुर में ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और नीदरलैंड के अधिकारियों से मुलाकात की
राबड़ी देवी ने अपना बंगला अन्य मंत्री को आवंटित किये जाने पर कहा, ‘मुझे बलपूर्वक हटाना होगा’
जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार हैं सशस्त्र बल : जनरल उपेंद्र द्विवेदी
पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है भारत का रक्षा क्षेत्र : राजनाथ सिंह
कोरबा में 35 लाख रूपए की लागत से साल बीज प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की योजना