अदालत ने पांच फीसदी मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा

Ads

अदालत ने पांच फीसदी मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा

  •  
  • Publish Date - April 2, 2026 / 03:54 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 03:54 PM IST

मुंबई, दो अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से उस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में पांच फीसदी आरक्षण रद्द करने के उसके (महाराष्ट्र सरकार) फैसले को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति आर.आई. छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने राज्य सरकार को एक हलफनामे के माध्यम से तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। उसने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार मई की तारीख तय की।

अधिवक्ता सैयद एजाज अब्बास नकवी की ओर से दाखिल याचिका में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के 17 फरवरी को जारी उस सरकारी आदेश (जीआर) को चुनौती दी गई है, जिसमें मुस्लिम आरक्षण को संविधान का उल्लंघन और समुदाय के हितों के खिलाफ बताया गया है।

नकवी ने अपनी याचिका में मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के सरकारी आदेश को “नस्ली भेदभाव” बताया है।

याचिका में कहा गया, “प्रतिवादी (महाराष्ट्र सरकार) अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ नस्ली भेदभाव कर रही है। यह संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”

इसमें कहा गया है कि आरक्षण खत्म करने के सरकार के फैसले के पीछे कोई उचित तर्क नहीं है।

याचिका के मुताबिक, जुलाई 2014 में महाराष्ट्र की तत्कालीन कांग्रेस-राकांपा (अविभाजित) सरकार ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले में मराठा समुदाय के लिए 16 फीसदी तथा मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।

इसमें कहा गया है कि तत्कालीन सरकार ने दोनों समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की श्रेणी में रखा था।

याचिका के अनुसार, इस फैसले को लागू करने वाले अध्यादेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने नौकरियों के लिए आरक्षण रद्द कर दिया, लेकिन शिक्षण संस्थानों में दाखिले में मुस्लिम समुदाय के लिए पांच फीसदी आरक्षण बरकरार रखा।

देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार की ओर से 17 फरवरी को जारी जीआर में कहा गया कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह (विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी (ए) के अंतर्गत) के लिए सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत

शीर्ष 5 समाचार