ठाणे अदालत ने कांस्टेबल पर हमले के मामले में तीन लोगों को बरी किया
ठाणे अदालत ने कांस्टेबल पर हमले के मामले में तीन लोगों को बरी किया
ठाणे, 18 जून (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 2018 में पुलिस के एक कांस्टेबल पर हमले और धमकी देने के मामले में तीन आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष का मामला संदिग्ध है और जांच अधिकारी ने यह तथ्य छुपाया कि शिकायतकर्ता कांस्टेबल खुद उस समय नशे में था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी.टी. पवार ने बुधवार के आदेश में कहा कि आरोपियों की दलील कि खुद कांस्टेबल और अन्य गवाहों ने उन पर हमला किया था, सही हो सकती है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता कांस्टेबल नवनाथ सदाशिव थोरवे ने दो मार्च 2018 को होली के दिन महाराष्ट्र के ठाणे शहर के येऊर गेट पर एक मोटरसाइकिल को रोका और देखा कि वाहन सवार नशे में थे। जब उनका वाहन जब्त किया गया तो आरोपियों ने कथित तौर पर कांस्टेबल से अपशब्द कहे और मारपीट की।
हालांकि, मेडिकल साक्ष्य ने मामले का रुख बदल दिया। अदालत ने गौर किया कि चिकित्सा अधिकारी ने गवाही दी कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता कांस्टेबल काफी नशे में था।
अदालत ने कहा कि साक्ष्यों के अवलोकन से प्रतीत होता है कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर अधूरी ‘मेडिको-लीगल’ रिपोर्ट हासिल की और यह तथ्य छिपाया कि जांच के समय शिकायतकर्ता नशे के प्रभाव में था।
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस कोई ‘ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट’ पेश नहीं कर सकी, आरोपियों को लगी चोटों की कोई संतोषजनक व्याख्या नहीं दे सकी और चश्मदीद गवाहों के बयान भी परस्पर विरोधाभासी थे जिससे आरोप पूरी तरह अविश्वसनीय हो गए।
इसके बाद अदालत ने मुजाराम उर्फ रामभाऊ बापूराव येनकुरे (40), सुनील गणपत रोकडे (40) और बालू बापूराव येनकुरे (36) को बरी कर दिया।
भाषा खारी मनीषा
मनीषा

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