झपटमारी मामले में ठाणे की अदालत ने मकोका के तहत आरोपी दो लोगों को बरी किया

झपटमारी मामले में ठाणे की अदालत ने मकोका के तहत आरोपी दो लोगों को बरी किया

झपटमारी मामले में ठाणे की अदालत ने मकोका के तहत आरोपी दो लोगों को बरी किया
Modified Date: June 11, 2026 / 03:30 pm IST
Published Date: June 11, 2026 3:30 pm IST

ठाणे, 11 जून (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने वर्ष 2022 के झपटमारी के एक मामले में कड़े महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोपी दो लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनकी पहचान साबित करने या उन्हें संगठित अपराध गिरोह से जोड़ने में पूरी तरह विफल रहा।

अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश (मकोका) वी. जी. मोहिते ने बुधवार को पारित अपने आदेश में सुनील उर्फ सोन्या शंकर फुलारे और अब्दुल्ला संजय ईरानी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 392 (लूटपाट) और 34 (समान मंशा) के साथ-साथ मकोका के आरोपों से बरी कर दिया।

विशेष लोक अभियोजक संजय मोरे ने अदालत को बताया था कि 21 अगस्त, 2022 को डोंबिवली इलाके में जब 70 वर्षीय सुनीता केरबा पाटिल सुबह की सैर पर निकली थीं, तब मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने उन्हें धक्का दिया और उनके गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए।

बचाव पक्ष के वकील पुनीत माहिमकर ने इन आरोपों का पुरजोर विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दलील दी कि मामले में कोई शिनाख्त नहीं कराई गई और आरोपियों से कथित तौर पर कबूलनामा दबाव डालकर लिखवाया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले में स्वतंत्र साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा।

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि आरोपी द्वारा बाद में वापस लिए गए कबूलनामे को बिना किसी पुख्ता सबूत के आधार नहीं बनाया जा सकता।

न्यायालय ने कहा, ‘इस मामले में जांच अधिकारियों ने दोनों आरोपियों की शिनाख्त परेड नहीं कराई। अभियोजन पक्ष ने किसी भी ऐसे गवाह का बयान दर्ज नहीं किया है, जिसने घटना को या अपराध में आरोपियों की संलिप्तता को देखा हो।’

इसके साथ ही अदालत ने लूटी गई सोने की चेन की बरामदगी न होने का भी संज्ञान लिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि वर्ष 2022 के अंत और 2023 की शुरुआत से हिरासत में बंद दोनों आरोपियों को 25,000-25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करने के बाद जेल से तत्काल रिहा किया जाए।

भाषा सुमित नरेश

नरेश


लेखक के बारे में