ठाणे की अदालत ने 2020 के हत्या के मामले में महिला को बरी किया

ठाणे की अदालत ने 2020 के हत्या के मामले में महिला को बरी किया

ठाणे की अदालत ने 2020 के हत्या के मामले में महिला को बरी किया
Modified Date: April 10, 2026 / 01:54 pm IST
Published Date: April 10, 2026 1:54 pm IST

ठाणे, 10 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने अपनी होने वाली बहू की हत्या के आरोप का सामना कर रही 48 वर्षीय महिला को यह कहते हुए बरी कर दिया कि मृत्युपूर्व बयानों में “स्पष्ट विसंगतियां” और “विरोधाभासी कथन” हैं, ऐसे में आरोपों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आठ अप्रैल के इस आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (भिवंडी) एन. के. करांडे ने कहा कि अभियोजन पक्ष पालघर जिले के विक्रमगढ़ निवासी कमल चंद्रकांत कनोजा के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।

अभियोजन के अनुसार, बोलने में अक्षम कनोजा ने 27 अक्टूबर 2020 को अपने सौतेले बेटे की होने वाली पत्नी अमिता पर केरोसिन छिड़क कर आग लगा दी थी। आरोपी के परिवार के साथ रहने वाली अमिता 72 प्रतिशत तक झुलस गई थी और बाद में नासिक के शासकीय अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

बचाव पक्ष के वकील रामराव एस. जगताप ने दलील दी कि अमिता के मृत्युपूर्व बयान विरोधाभासी थे और संभव है कि अमिता को उसके पिता व भाई ने प्रभाव में लिया हो।

अदालत का निर्णय दो विरोधाभासी मृत्युपूर्व बयानों पर आधारित रहा। पुलिस को दिए गए बयान में आरोपी को दोषी बताया गया, जबकि मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज और साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए गए दूसरे बयान में आग को दुर्घटना बताया गया और यह भी कहा गया कि “वहां कोई मौजूद नहीं था।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि उस चिकित्सक की गवाही नहीं कराई गई, जिसने कथित रूप से अमिता की बयान देने की स्थिति को प्रमाणित किया था।

न्यायाधीश ने अमिता के प्रभाव में आने की आशंका जताई और यह भी कहा कि रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट आरोपी महिला को अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

कनोजा को तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए न्यायाधीश ने कहा, “अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है।’’

भाषा खारी वैभव

वैभव


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