मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साइबाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में कथित रूप से शामिल होने के लिए आपराधिक मामले का सामने कर रहे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे विवादों में उलझने के बजाय अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करें।
सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को उन्हें दी गई अंतरिम जमानत अवधि को बढ़ा दिया।
ट्रॉम्बे पुलिस ने अक्टूबर 2025 में नौ विद्यार्थियों के खिलाफ जीएन साइबाबा की पुण्यतिथि मनाने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
जीएन साइबाबा को मार्च 2024 में माओवादी संबंधों के एक कथित मामले में बरी कर दिया गया था।
पूर्व प्रोफेसर पर दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाने का भी आरोप था।
विद्यार्थियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें राष्ट्र की छवि खराब करना, विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता पैदा करना और गैरकानूनी सभा करना आदि शामिल हैं।
विशेष अभियोजक शिशिर हीरे ने बताया कि उन्होंने पिछली बार अदालत से आरोपियों को अदालत में पेश होने का निर्देश देने का आग्रह किया था और सोमवार को सभी छात्र सत्र न्यायालय में पेश हुए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज बी. ओझा ने सुनवाई के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में शामिल होने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए।
अदालत ने पांच फरवरी को अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।
साइबाबा को प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से कथित संबंधों के आरोप में एक दशक तक जेल में रखा गया था, जिसके बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया था।
साइबाबा का 12 अक्टूबर, 2024 को निधन हो गया था।
भाषा जितेंद्र नरेश
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