‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए नौसेना के दो शीर्ष अधिकारी युद्ध सेवा पदक से सम्मानित
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए नौसेना के दो शीर्ष अधिकारी युद्ध सेवा पदक से सम्मानित
मुंबई, एक अप्रैल (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पिछले वर्ष चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में विशिष्ट सेवा देने वाले दो शीर्ष नौसेना अधिकारियों को बुधवार को युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया।
एडमिरल त्रिपाठी ने यहां आयोजित नौसेना अलंकरण समारोह में नौसेना अभियान महानिदेशक (डीजीएनओ) वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद और वाइस एडमिरल राहुल गोखले को पदक प्रदान किए।
वाइस एडमिरल प्रमोद को दिए गए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि उन्होंने पिछले वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान नौसैनिक अभियानों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि अप्रैल 2025 में पाकिस्तान के साथ तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर, उन्हें भारतीय प्रतिक्रिया योजना को शीघ्रता से तैयार करने और उसे जल्द से जल्द क्रियान्वित करने का कार्य सौंपा गया था।
डीजीएनओ के रूप में, उन्होंने सभी उच्च निर्देशों का पालन करते हुए एक सटीक कार्ययोजना तैयार की, ताकि पाकिस्तानी सेनाओं को करारा जवाब दिया जा सके, साथ ही अपनी इकाइयों, व्यापार और भारत के समुद्री हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
इसमें कहा गया है, ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी विस्तृत योजना, उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना पोतों की आक्रामक तैनाती और विशेष अभियान दलों के अभिनव उपयोग के परिणामस्वरूप पाकिस्तानी नौसेना को संचालन के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिला और उन्हें अपने बंदरगाहों में रहने या पाकिस्तान तट के करीब संचालन करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए किसी भी समुद्री खतरे को समाप्त कर दिया गया।’’
इसमें कहा गया है, “उनकी पेशेवर दक्षता, सटीक परिचालन योजना, राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना अभियान महानिदेशक के रूप में उनकी सेवा को मान्यता देते हुए, वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद को युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया जाता है।”
युद्ध सेवा पदक युद्ध/संघर्ष/शत्रुता के दौरान उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
वाइस एडमिरल गोखले को दिए गए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद और ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के दौरान, उनकी दूरदर्शिता ने सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सहित छह मिसाइल सफलतापूर्वक दागा जाना सुनिश्चित किया और 96 घंटे के भीतर 22 नौसैनिक पोतों को पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार कर दिया। यह 1971 के युद्ध के बाद सबसे बड़े नौसैनिक तैनाती में से एक था।
प्रशस्ति पत्र में कहा गया है, ‘इस कार्यबल ने एक मजबूत बल के रूप में कार्य किया, पाकिस्तान की नौसैनिक गतिशीलता को पंगु बना दिया और उसकी नौसेना को तट के करीब सीमित कर दिया। नौसैनिक बेड़े की सैन्य गतिविधियों ने शत्रु को तत्काल राजनयिक संपर्क स्थापित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे सशस्त्र कार्रवाई का सहारा लिए बिना राष्ट्र के वांछित राजनीतिक लक्ष्य प्राप्त हुए।’
प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में नौसेना सलाहकार के रूप में अपने पिछले राजनयिक कार्य के आधार पर समुद्री सिद्धांत और शत्रु की मानसिकता की उनकी समझ ने उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना द्वारा समुद्री नियंत्रण स्थापित करने और ‘गैर-संपर्क’ बल-प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि ‘‘पश्चिमी बेड़े के बेड़ा कमांडर के रूप में अत्यंत गतिशील, शत्रुतापूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रदर्शित असाधारण रणनीतिक दूरदर्शिता, कुशल संचालन, व्यावहारिक, साहसी और निर्णायक नेतृत्व के लिए वाइस एडमिरल राहुल विलास गोखले को युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया जाता है।’’
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की कमान संभालने वाले कैप्टन सूरज रेबेरा और कैप्टन विकास गर्ग, अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बियों की कमान संभालने वाले कैप्टन पीयूष कटियार, कमांडर राजेश्वर शर्मा और कमांडर विवेक कुरियाकोस को नौसेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
इस अभियान में भूमिका के लिए कमांडर कपिल कुमार, लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ पुरबिया और मुख्य यांत्रिक अभियंता मनोज कुमार को भी नौसेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
भाषा अमित देवेंद्र
देवेंद्र

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