महाराष्ट्र के मेलघाट में छोड़े गए गिद्धों ने जंगली साथियों को किया आकर्षित
महाराष्ट्र के मेलघाट में छोड़े गए गिद्धों ने जंगली साथियों को किया आकर्षित
मुंबई, 10 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मेलघाट बाघ अभयारण्य में लगभग एक दशक के बाद एक जंगली हिमालयी ग्रिफॉन गिद्ध देखा गया है जिससे संकेत मिलता है कि वहां छोड़े गए गिद्ध अपने जंगली साथियों को फिर से उस इलाके की ओर आकर्षित कर रहे हैं। एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने यह जानकारी दी।
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के निदेशक किशोर रिठे ने सोमवार को कहा कि यह देखा जाना इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेलघाट और ताडोबा इलाके से गिद्ध स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए थे। एक हिमालयी ग्रिफॉन की मौजूदगी यह दर्शाती है कि वन्य जीवन को पुनः स्थापित करने के निरंतर प्रयासों से पर्यावरण की स्थिति अब बेहतर हो रही है।
उन्होंने बताया कि मेलघाट में हिमालयी गिद्ध देखे जाने के बाद, हाल में ताडोबा अंधारी बाघ अभयारण्य में एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध भी देखा गया।
‘डाइक्लोफेनाक’, एसिक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन और निमेसुलाइड जैसी कुछ दवाओं के इस्तेमाल की वजह से महाराष्ट्र में 2004 तक गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट देखी गई थी।
इसके बाद, महाराष्ट्र वन विभाग ने लगभग विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को पुनर्जीवित करने के लिए बीएनएचएस के साथ काम करना शुरू किया।
इस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, पिछले साल 23 अप्रैल को पिंजौर स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र से गंभीर रूप से लुप्तप्राय लंबी चोंच वाले 15 गिद्धों को मेलघाट बाघ अभयारण्य के सोमथाणा रेंज में स्थानांतरित किया गया।
पिछले साल 19 दिसंबर को गिद्धों की गतिविधि, व्यवहार और जीवित रहने की स्थिति का अध्ययन करने के लिए उनके शरीर पर जीएसएम और ‘सैटेलाइट ट्रांसमीटर’ लगाए गए थे। उन्हें इस साल दो जनवरी को पिंजरे से मुक्त किया गया और फिर बीएनएचएस ने बाड़े के बाहर प्राकृतिक तरीके से उन्हें भोजन देना शुरू किया।
बीएनएचएस के संरक्षण जीवविज्ञानी भास्कर दास ने कहा कि मेलघाट में छोड़े गए गिद्धों द्वारा जंगली गिद्धों को आकर्षित करना एक बड़ी उपलब्धि है।
गिद्धों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा बीएनएचएस वर्तमान में कई प्रजनन केंद्र और पुनर्वास स्थल संचालित करता है। यह फिलहाल 700 गिद्धों की देखभाल कर रहा है।
भाषा प्रचेता खारी
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