Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की कृपा से पूरी होंगी हर मनोकामना! जानिए कैसे करें पूजा और क्या है सबसे शुभ समय?

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है और यह दिन बेहद खास माना जाता है। 2026 में 23 मार्च को पड़ने वाली पंचमी पर स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं इस साल का शुभ मुहूर्त।

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की कृपा से पूरी होंगी हर मनोकामना! जानिए कैसे करें पूजा और क्या है सबसे शुभ समय?

(Chaitra Navratri 2026 Day 5 / Image Credit: IBC24 News File)

Modified Date: March 22, 2026 / 05:57 pm IST
Published Date: March 22, 2026 5:57 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है।
  • मां की गोद में भगवान कार्तिकेय का बाल रूप विराजमान।
  • पीले फूल और केले का भोग अर्पित करें।

Chaitra Navratri 2026 Day 5: इस बार चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन सोमवार 23 मार्च 2026 को पड़ रहा है और यह दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता है, इसलिए उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। यह स्वरूप ममता, स्नेह और सुरक्षा का प्रतीक है। मां की गोद में भगवान कार्तिकेय का बाल रूप विराजमान होता है, जो दिखाता है कि मां अपने भक्तों की रक्षा संतान की तरह करती हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व

मां स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जिनके परिवार में परेशानियां चल रही हों या संतान से जुड़ी चिंताएं हों। इस दिन की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह दिन बड़ी इच्छाओं की पूर्ति और जीवन को सरल बनाने के लिए बहुत विशेष माना जाता है।

पूजा का शुभ समय

23 मार्च 2026 को पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ समय सुबह का है। विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:52 तक है। इस समय पर पूजा करने से घर में खुशहाली और मानसिक शांति आती है। सही समय पर पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

सरल पूजन विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और मां का आभार व्यक्त करें। पीले फूल और फल अर्पित करें, क्योंकि पीला रंग मां को प्रिय है। भोग में केले का फल अर्पण करें। इस दौरान मां के मंत्रों का जाप करें, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सहजता आती है।

आरती का महत्व

पूजा के बाद मां स्कंदमाता की आरती करना आवश्यक है। सुबह की आरती मुख्य पूजा के बाद और संध्या आरती सूर्यास्त के समय करना उत्तम माना जाता है। आरती के समय पूरे परिवार का साथ होना आपसी तालमेल बढ़ाता है। इस दौरान अपनी बड़ी इच्छाओं की प्रार्थना मां से करें।

भक्ति से लाभ

सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई पूजा और आरती से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं। इससे घर में सुख-शांति, संपत्ति और सामाजिक मान-सम्मान बढ़ता है। मां स्कंदमाता की कृपा से न केवल जीवन में समृद्धि आती है, बल्कि परिवार में प्रेम और तालमेल भी मजबूत होता है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।