Chaitra Navratri 2026 Day 7: आज का दिन मां कालरात्रि के नाम! इस भोग को अर्पित करने से हर विपत्ति और बाधा होगी खत्म!

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Chaitra Navratri 2026 Day 7: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। मान्यता है कि सप्तमी तिथि पर विधिपूर्वक पूजा और उनके पसंदीदा भोग अर्पित करने से जीवन के बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं। इस दिन सही पूजा और भोग से मां की विशेष कृपा मिलती है और विपत्तियां मिटती हैं।

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 11:48 AM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 11:48 AM IST

(Chaitra Navratri 2026 Day 7 / Image Credit: sadhana app)

HIGHLIGHTS
  • चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है।
  • मां कालरात्रि का रूप काला, चार हाथों वाला और गधे पर सवार होता है।
  • उनका प्रिय भोग गुड़ या गुड़ से बनी चीजें हैं।

Chaitra Navratri 2026 Day 7 Bhog: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के उग्र और प्रभावशाली रूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के सभी भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है। उनका रूप भले ही भयंकर दिखता है, लेकिन वे अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल देती हैं। इसी कारण इन्हें शुभंकारी कहा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा और सही भोग अर्पित करने से जीवन के बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं।

मां कालरात्रि का रूप (Maa Kalratri ka Roop)

मां कालरात्रि का वर्ण काला और श्यामल होता है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में बिजली की माला सुशोभित रहती है। मां गधे पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में खड्ग, दूसरे में लोहे का कांटा और बाकी दो हाथ अभय और वर मुद्रा में होते हैं। उनका यह भयंकर रूप नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का नाश करता है तथा भक्तों को सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करता है।

मां कालरात्रि का पसंदीदा भोग (Maa Kalratri ka Bhog)

शास्त्रों के अनुसार मां कालरात्रि को गुड़ का भोग सबसे प्रिय है। सप्तमी के दिन गुड़ या गुड़ से बनी चीजें भोग के रूप में अर्पित करें। भोग अर्पित करने के बाद उसका कुछ अंश दक्षिणा के रूप में ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसा करने से शोक, दरिद्रता और आकस्मिक संकट दूर होते हैं। इसके अलावा शत्रुओं का नाश होता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

पूजा के लाभ (Maa Kalratri ki Puja)

मां कालरात्रि की पूजा अज्ञात भय और बुरे सपनों से मुक्ति दिलाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह के प्रभाव को कम करने के लिए भी उनकी पूजा सर्वोत्तम मानी जाती है। मां की कृपा से भक्तों पर टोने-टोटके या ऊपरी बाधाओं का कोई असर नहीं होता। नियमित पूजा और भोग अर्पित करने से जीवन में शांति, सुरक्षा और समृद्धि बनी रहती है।

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मां कालरात्रि की पूजा कब करनी चाहिए?

मां कालरात्रि की पूजा चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन यानी सप्तमी तिथि पर करनी चाहिए।

मां कालरात्रि को कौन सा भोग सबसे प्रिय है?

गुड़ या गुड़ से बनी चीजें मां कालरात्रि को सबसे प्रिय भोग मानी जाती हैं।

पूजा के बाद भोग का क्या करना चाहिए?

भोग का कुछ हिस्सा दक्षिणा के रूप में ब्राह्मण को देना चाहिए।

मां कालरात्रि की पूजा करने के क्या लाभ हैं?

भय, शत्रु, नकारात्मक ऊर्जा और आकस्मिक संकट दूर होते हैं, साथ ही जीवन में शांति और सुरक्षा मिलती है।