Chaitra Navratri 2026 Fourth Day: आज मां कूष्मांडा की आराधना का दिन! जानिए सही पूजा विधि और मंत्र, मां की कृपा से सारे कष्ट होंगे दूर!

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Chaitra Navratri 2026 Fourth Day: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से महत्व रखती है। इस दिन व्रती सही पूजा विधि, मां को प्रिय भोग मालपुआ, हलवा-पूरी अर्पित करते हैं। आइए जानें आज चैत्र नवरात्रि के दिन चौथे दिन मां कूष्मांडा की कथा, पूजा विधि के साथ जानें मां को कौन सा भोग अर्पित करें।

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 11:09 AM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 11:09 AM IST

(Chaitra Navratri 2026 Fourth Day/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित
  • मां कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जिनके आठ हाथ हैं
  • प्रिय भोग: कद्दू, मालपुआ, हलवा-पूरी

Chaitra Navratri 2026 Fourth Day: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। इनमें चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उनकी पूजा से रोग, शोक और कठिनाइयां दूर होती है और आयु, स्वास्थ्य, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन विधि-पूर्वक व्रत और पूजा करने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप

मां कूष्मांडा को अष्टभूजा देवी कहा जाता है क्योंकि उनके आठ हाथ हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला होती है। इनका वाहन सिंह और कुम्हड़ा (कद्दू) इनका प्रिय भोग है, इसलिए इन्हें कूष्मंडा कहा जाता है। माना जाता है कि जब सृष्टि अस्तित्वहीन थी, तब मां ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उनका निवास सूर्य मंडल में है और उनका तेज सूर्य के समान है, जो पूरे ब्रह्मांड को आलोकित करता है।

मां कूष्मांडा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि नहीं बनी थी और अंधकार व्याप्त था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से सृष्टि को आकार दिया। इसी मुस्कान से सूर्य, चंद्रमा, तारे और ग्रह उत्पन्न हुए। मां ने अंधकार दूर कर प्रकाश फैलाया। उनकी पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, रोग और शोक दूर होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। थोड़ी भक्ति से ही मां प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद देती हैं।

पूजा विधि और विशेष भोग

नवरात्रि के चौथे दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं। मां को पीले फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। विशेष भोग के रूप में मालपुआ, हलवा-पूरी या पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मंत्र जाप के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

मां कूष्मांडा के मंत्र और लाभ

  • सर्वभूत मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
  • मूल मंत्र: “ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः”
  • बीज मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः”

इन मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करने से मां की कृपा मिलती है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं।

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मां कूष्मांडा की पूजा कब की जाती है?

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

मां कूष्मांडा को किस भोग का प्रिय माना जाता है?

मां को कद्दू (कुम्हड़ा), मालपुआ, हलवा-पूरी और पीले रंग की मिठाई प्रिय हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा के लाभ क्या हैं?

पूजा से रोग, शोक और कठिनाइयाँ दूर होती हैं, आयु, स्वास्थ्य, यश और समृद्धि मिलती है।

पूजा की विधि कैसी होनी चाहिए?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। मां की प्रतिमा स्थापित करके दीप, फूल, फल, भोग और मंत्र जाप करें। व्रत में सात्विक भोजन और फलाहार लिया जाता है।