बीएफएसआई क्षेत्र में कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं, कर्ज वृद्धि में अल्पकालिक सुस्ती के आसार: दीपक पारेख

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बीएफएसआई क्षेत्र में कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं, कर्ज वृद्धि में अल्पकालिक सुस्ती के आसार: दीपक पारेख

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  • Publish Date - May 5, 2026 / 05:29 PM IST,
    Updated On - May 5, 2026 / 05:29 PM IST

मुंबई, पांच मई (भाषा) बैंक क्षेत्र के दिग्गज दीपक पारेख ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं से बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र के सामने कोई बड़ा प्रणालीगत जोखिम नहीं है लेकिन कर्ज वृद्धि में अल्पकालिक सुस्ती आ सकती है।

एचडीएफसी लि. के पूर्व चेयरमैन पारेख ने यहां ‘सीआईआई बीएफएसआई शिखर सम्मेलन’ 2026 के दौरान संवाददाताओं से अलग से बातचीत में कहा, ‘‘ बीएफएसआई की बात करें तो मुझे नहीं लगता कि बहुत चिंता की बात है। संभवतः कारोबार एवं नए ऋण आवेदनों में कुछ सुस्ती आ सकती है।’’

उन्होंने कहा कि व्यापक वित्तीय प्रणाली मजबूत एवं पर्याप्त पूंजी वाली बनी हुई है लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां नए ऋण की मांग तथा समग्र कारोबारी गति को प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर तेल, विमानन, होटल व लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों पर अधिक पड़ने का अनुमान है, न कि बीएफएसआई पर।

पारेख ने भारत में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) की बढ़ती अहमियत का उल्लेख भी किया और इसे ऐसा उभरता माध्यम बताया जो परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करने के इच्छुक डेवलपर और किराये के मॉडल को पसंद करने वाले उपयोगकर्ताओं के बीच की खाई को पाटता है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक क्षमता केंद्र, आईटी कंपनियां और बड़ी कॉरपोरेट इकाइयां तेजी से कार्यालय स्थान किराये पर लेना पसंद कर रही हैं। इससे रीट, निवेशकों को स्थिर प्रतिफल एवं पूंजी वृद्धि का अवसर देकर लोकप्रिय हो रहे हैं तथा यह क्षेत्र आगे और विस्तार की संभावना रखता है।

बीमा के बारे में पारेख ने कहा कि भारत में इसका प्रसार लगभग तीन प्रतिशत है जो वैश्विक औसत करीब आठ प्रतिशत से काफी कम है। प्रीमियम पर कर लाभ हटाए जाने के बाद इस क्षेत्र की वृद्धि धीमी हुई है लेकिन बीमा घरेलू बचत और सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है।

उन्होंने इसके प्रसार के लिए जागरूकता और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता की भी बात कही।

बैंक क्षेत्र के रुझानों पर उन्होंने कहा कि जमा संग्रह की गति कुछ धीमी हुई है क्योंकि खुदरा निवेशक अपनी बचत को म्यूचुअल फंड के व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) में लगा रहे हैं। इन स्थिर घरेलू निवेश प्रवाहों ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी की भरपाई करने में मदद की है, जिससे घरेलू वित्तीय प्रणाली की मजबूती बढ़ी है और विदेशी पूंजी पर निर्भरता घटी है।

प्रौद्योगिकी की भूमिका पर पारेख ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र पर कृत्रिम मेधा (एआई) का प्रभाव अभी विकसित हो रहा है और अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि एआई से उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन रोजगार एवं संचालन पर इसके प्रभाव पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि वित्तीय सेवा क्षेत्र में विदेशी निवेशकों और बड़े भारतीय समूहों की बढ़ती रुचि इस क्षेत्र की मजबूत विकास संभावनाओं का संकेत देती है।

पारेख ने कहा कि हाल के चुनावी परिणाम मतदाताओं की बदलाव की इच्छा को दर्शाते हैं लेकिन इनके कोई प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव नहीं हैं और नई सरकारें अकसर नई नीतिगत पहल लेकर आती हैं।

भाषा निहारिका रमण

रमण