आयु प्रमाणपत्र होने पर नाबालिग की उम्र पता करने के लिए चिकित्सीय जांच गैरकानूनी: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
आयु प्रमाणपत्र होने पर नाबालिग की उम्र पता करने के लिए चिकित्सीय जांच गैरकानूनी: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
लखनऊ, 29 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि स्कूल, शिक्षा परिषद, नगर निगम, नगरपालिका या पंचायत के आयु संबंधी प्रमाणपत्र उपलब्ध होने की स्थिति में किसी नाबालिग की उम्र तय करने के लिए उसकी चिकित्सकीय जांच कराना गैरकानूनी है।
अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए किशोर न्याय बोर्ड और विशेष पॉक्सो अदालत के आदेशों को रद्द कर दिया और नाबालिग लड़के को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति मनीष कुमार की पीठ ने शनिवार को एक नाबालिग आरोपी द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर यह आदेश पारित किया।
मामले के मुताबिक पिछले साल 11 मार्च को प्रतापगढ़ जिले के लीलापुर थाने में एक नाबालिग लड़के पर 15 साल की लड़की के साथ छेड़छाड़ करने और उसे धमकाने के आरोप में बाल यौन संरक्षण (पॉक्सो), अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
नाबालिग याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गयी थी कि घटना के समय उसकी उम्र 16 साल से कम थी।
आरोपी के हाई स्कूल के प्रमाणपत्र में उसकी जन्मतिथि एक जनवरी 2010 बताई गई थी, जबकि उसके प्राथमिक विद्यालय के रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 13 मई 2009 दर्ज थी लेकिन इसके बावजूद किशोर न्याय बोर्ड ने उसकी उम्र तय करने के लिए चिकित्सीय जांच का आदेश दिया था, जिसे प्रतापगढ़ की विशेष अपीलीय अदालत ने भी सही ठहराया था।
इन दोनों आदेशों को उच्च न्यायालय में दायर एक पुनर्विचार याचिका के जरिये चुनौती दी गई थी जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94 के अनुसार उम्र तय करने के लिए सबसे पहले स्कूल या बोर्ड के प्रमाणपत्र पर विचार किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि स्कूल या बोर्ड के बाद नगर निगम, नगरपालिका या पंचायतों द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्रों पर विचार किया जाना चाहिए। केवल इन दस्तावेजों की अनुपस्थिति में ही चिकित्सीय जांच की जा सकती है।
न्यायालय ने पाया कि उपलब्ध दोनों दस्तावेजों से यह साबित होता है कि आरोपी याचिकाकर्ता नाबालिग था और इसलिए मेडिकल जांच का आदेश देना कानून के खिलाफ था।
अदालत ने नाबालिग याचिकाकर्ता को सशर्त जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह एक साल तक हर महीने की 10 तारीख को अपने अभिभावक के साथ जिला परिवीक्षा अधिकारी के सामने पेश हो और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि से दूर रहे।
भाषा सं. सलीम गोला
गोला
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Web Title: आयु प्रमाणपत्र होने पर नाबालिग की उम्र पता करने के लिए चिकित्सीय जांच गैरकानूनी: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
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