छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने किया उपन्यास ‘गजशार्दूल’ का विमोचन

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने किया उपन्यास ‘गजशार्दूल’ का विमोचन
Modified Date: May 30, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: May 30, 2026 8:35 pm IST

रायपुर

 

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 30 मई शनिवार को रायपुर स्थित स्पीकर हाउस में
प्रदेश के कल्चुरी क्षत्रिय राजाओं के शौर्य पर केंद्रित उपन्यास ‘गजशार्दूल’ का विमोचन किया।

इस दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने इस पुस्तक के लेखक जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा निवासी अनीश सिंह की छत्तीसगढ़ के इतिहास को पाठकों के समक्ष लाने के लिये सराहना की । इस विषय पर उन्हें आगे भी शोध और रचनात्मक कार्य करने के लिये प्रेरित किया।

पुस्तक में मानव मूल्यों का गहरा चित्रण

यह उपन्यास केवल युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, कूटनीति, धर्म-परायणता, वीरता और मानव मूल्यों का गहरा चित्रण है। लेखक अनीश सिंह खरसन ने छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक गौरव, संस्कृति और वीर परंपरा को कथा के माध्यम से जीवंत करने का सफल प्रयास किया है।

क्यों खास है ‘गजशार्दूल’ उपन्यास

‘गजशार्दूल’ एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इसकी कथा लगभग 11वीं शताब्दी के दक्षिण कोसल राज्य के राजनीतिक और सैन्य संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है। इस कथा का मुख्य केंद्र कल्चुरी वंश और नागवंशी शासकों के बीच चल रहा सत्ता-संघर्ष है। कहानी में राज-सत्ता पाने के लिए विश्वासघात, युद्धनीति और वीरता के कई रूप देखने को मिलते हैं। कहानी की शुरुआत उस समय से होती है, जब दक्षिण कोसल राज्य के युवराज जाजल्यदेव को सूचना मिलती है कि चक्रकोट राज्य के नाग सैनिक चित्रोत्पला नदी के रास्ते राज्य की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। यह सूचना राज्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत थी। जाजल्यदेव तत्काल अपने पिता राजा पृथ्वीदेव और सेनापति जगपाल को इसकी जानकारी देते हैं। राज्य में युद्ध की तैयारी शुरू हो जाती है, क्योंकि नाग सैनिक सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रमण करके गाँवों का विध्वंस करने लगते हैं। इसके साथ ही कथा में राजनीतिक कूटनीति भी सामने आती है।’

राजपूत राजाओं के शौर्य पर केंद्रित

चक्रकोट राज्य का प्रतिनिधि दक्षिण कोसल दरबार में आता है और संधि के लिए शर्तें रखता है। वह भारी मात्रा में स्वर्ण मुद्रा की माँग करता है और साथ ही यह भी चाहता है कि दक्षिण कोसल राज्य नाग शासक सोमेश्वरदेव की अधीनता स्वीकार करे। यह प्रस्ताव राज्य की प्रतिष्ठा के लिए अपमानजनक होता है, लेकिन परिस्थितियों के कारण पृथ्वीदेव अस्थायी रूप से इसे स्वीकार कर लेते हैं। इससे राज्य के भीतर असंतोष और संघर्ष की भावना पैदा होती है। कहानी में आगे चलकर जाजल्यदेव का चरित्र एक साहसी, तेजस्वी और रणनीतिक योद्धा के रूप में उभरता है। इस कथा में हाथियों की सेना, घुड़सवार सैनिकों और पैदल सेना के साथ भयंकर संघर्ष का चित्रण किया गया है। युद्धनीति के अंतर्गत छल, रणनीति और साहस-तीनों का प्रयोग किया गया है।

धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा

इस उपन्यास में एक महत्वपूर्ण पात्र रुद्रशिव नामक संन्यासी भी है, जो जाजल्यदेव के जीवन और निर्णयों को प्रभावित करता है। वह उसे भय से मुक्त होकर धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उसके विचार जाजल्यदेव के व्यक्तित्व को आध्यात्मिक गहराई देते हैं। जाजल्यदेव साहसी योजनाओं, गुप्त अभियानों और युद्धों के माध्यम से चक्रकोट राज्य की शक्ति को चुनौती देते हैं। अंततः वे अपने साहस, बुद्धिमत्ता और सहयोगियों की सहायता से नाग शासक सोमेश्वरदेव को परास्त कर देते हैं। प्रखर वीरता और अद्भुत शक्ति के कारण उन्हें ‘गजशार्दूल’ की उपाधि दी जाती है, जिसका अर्थ है-हाथी के समान शक्तिशाली और सिंह के समान वीर योद्धा।
पुस्तक के विमोचन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष सिंह के विशेष सचिव अरुण कुमार बिसेन, वरिष्ठ पत्रकार ललित कुमार सिंह मौजूद रहे।

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Associate Executive Editor, IBC24 Digital