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Vishnu Ka Sushasan: सशस्त्र माओवाद पर साय सरकार का ‘फाइनल अटैक’.. अब शांति, सुरक्षा और विकास की राह पर बढ़ रहा बस्तर

Vishnu Ka Sushasan: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्त, 90% से अधिक माओवादियों ने सरेंडर किया।

Chhattisgarh Naxalism Deadline

Chhattisgarh Naxalism Deadline

satya prakash
Published: 20 Mar 2026 | 4:03 pmModified: 24 Mar 2026 | 4:22 pm
HIGHLIGHTS
  1. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का 2026 तक अंत
  2. 90 प्रतिशत से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण
  3. विकास और पुनर्वास के जरिए शांति स्थापित

रायपुर: साल 2023 के आखिर में सरकार में वापसी करने वाली भाजपा ने प्रदेश के सबसे संवेदनशील और अनुभवी नेता विष्णुदेव साय को मुखिया के तौर पर कमान सौंपी। तब छत्तीसगढ़ प्रदेश कई तरह की कठिनाइयों से गुजर रहा था। (Chhattisgarh Naxalism Deadline) इनमें से एक सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद की थी। छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन से ज्यादा जिले 'लाल आतंक' की चपेट में थे।

दक्षिण बस्तर विकास और शांति से कोसों दूर था। यहाँ दिन-प्रतिदिन सशस्त्र माओवादी आम आदिवासी और सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचा रहे थे। इस तरह नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर बस्तर हिंसा की चपेट में था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के इस दर्द को समझा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और निर्देशन में प्रदेश की इस सबसे बड़ी समस्या का स्थायी समाधान करने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रबल इच्छाशक्ति, राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और विकास कार्यों के विस्तार के परिणामस्वरूप नक्सल-मुक्त बस्तर का सपना तेजी से साकार हो रहा है और विकसित छत्तीसगढ़ का स्वरूप स्पष्ट रूप से आकार ले रहा है। मार्च 2026 के आखिर तक सशस्त्र माओवाद का अंत सुनिश्चित हो चुका है।

बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति पर माओवादियों का भरोसा

मुख्यमंत्री साय के अगुवाई में नक्सलवाद का अंत हिंसा के बजाय विश्वास और भरोसे पर आधारित रहा। सरकार का प्रयास माओवादियों को न्यूट्रलाइज करने के बजाय उनका भरोसा जीतना रहा। (Chhattisgarh Naxalism Deadline) सरकार चाहती थी कि भटके हुए युवा, जो नक्सल संगठन में हैं, जंगलों से बाहर आएं, आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ उठाते हुए समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करें।

आत्मसमर्पण और पुनर्वास के साथ ही मुख्यमंत्री साय का प्रयास रहा कि केंद्र के साथ समन्वय स्थापित करते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, आधारभूत अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर तेजी से बढ़ाए जाएँ। सरकार इसमें पूरी तरह सफल रही है। आज मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ और विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए बंद हो चुके स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों का पुनः संचालन किया जा रहा है।

90 प्रतिशत से ज्यादा नक्सली सरेंडर, गिरफ्तार और ढेर

नक्सलवाद के खात्मे के लिए केंद्र सरकार के समन्वय में साय सरकार सक्रिय है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया है। सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई के चलते 90 प्रतिशत से अधिक नक्सली सरेंडर, गिरफ्तार और मारे जा चुके हैं। नक्सल उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब तक राज्य में बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी सफलता पिछले वर्ष अक्टूबर में मिली थी, जब जगदलपुर में केंद्रीय समिति के एक सदस्य सहित 210 माओवादियों ने पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया था। यह राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण था।

छत्तीसगढ़ में कई बड़े नक्सलियों का सरेंडर

लाल आतंक के खात्मे की डेडलाइन के बीच मोस्ट वांटेड माओवादी पापाराव ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इससे पहले 6 करोड़ के इनामी और 135 जवानों के हत्यारे नक्सली देवजी ने इसी साल फरवरी में तेलंगाना में सरेंडर किया था। (Chhattisgarh Naxalism Deadline) करीब 62 साल के नक्सली देवजी को तिप्पिरी तिरुपति उर्फ संजीव पल्लव नाम से भी जाना जाता है। देवजी के साथ ही नक्सली मल्ला राजिरेड्डी ने भी आत्मसमर्पण किया। इसके अलावा कई इनामी नक्सली आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सरेंडर कर चुके हैं।

हिड़मा और बसवराजू का हुआ एनकाउंटर

नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे घने मरेडमल्ली जंगलों में मुठभेड़ में खूंखार नक्सली माडवी हिड़मा मारा गया था। मई 2025 में बसवराजू उर्फ नंबाला केशव राव अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों के हाथों मुठभेड़ में मारा गया था। इसके अलावा भी कई नक्सली एनकाउंटर में ढेर हो चुके हैं। इस तरह अब प्रदेश से लगभग सशस्त्र माओवाद का खत्म तय हो चुका है। एक आंकड़े के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अब सक्रिय माओवादियों की संख्या 100 से भी कम है और सरकार का प्रयास है कि शेष माओवादियों को भी पुनर्वास योजना से जोड़ते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

उत्तर: A1: सुरक्षा बलों की कार्रवाई, आत्मसमर्पण, पुनर्वास योजना और बुनियादी ढांचे का विकास।

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लेखक के बारे में

satya prakash
satya prakash

A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown

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Web Title: Chhattisgarh Achieves Naxal End 2026: Vishnu Dev Sai Leads Successful Rehabilitation and Peace Initiative

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