Chaitra Amavasya 2026: क्यों कहते हैं इस अमावस्या को ‘भूतड़ी’, और लोग कौन से उपाय करते हैं इस दिन भूत-प्रेत से बचने के लिए

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र माह की अमावस्या को खास तौर पर चैत्र अमावस्या कहा जाता है और इसे 'भूतड़ी अमावस्या' भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भूत-प्रेत सक्रिय रहते हैं। लोग इसे धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों से मनाते हैं, ताकि नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिल सके।

Chaitra Amavasya 2026: क्यों कहते हैं इस अमावस्या को ‘भूतड़ी’, और लोग कौन से उपाय करते हैं इस दिन भूत-प्रेत से बचने के लिए

(Chaitra Amavasya 2026/ Image Credit: Pexels)

Modified Date: March 9, 2026 / 06:16 pm IST
Published Date: March 9, 2026 6:13 pm IST
HIGHLIGHTS
  • चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं।
  • पितरों के तर्पण और पिंडदान का प्रमुख दिन है।
  • दान करने से पुण्य बढ़ता है और घर में खुशहाली आती है।

Bhutdi Amavasya 2026: सनातन धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को अमावस्या कहा जाता है। साल में कुल 12 अमावस्या आती हैं और हर अमावस्या का अपना विशेष महत्व होता है। अमावस्या के दिन पितरों को याद किया जाता है और पवित्र नदियों में स्नान-दान, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितरों को तर्पण और पिंडदान करने से वे प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है।

चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे से शुरू होगी और 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। इसके अनुसार, चैत्र अमावस्या का मुख्य दिन 19 मार्च 2026 है, जब लोग स्नान-दान और पितरों का तर्पण करते हैं। यह तिथि खासकर पितृ स्मरण और धार्मिक कर्मों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्यों कहा जाता है भूतड़ी अमावस्या?

चैत्र मास की अमावस्या को लोक भाषा में ‘भूतड़ी अमावस्या’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक शक्तियों और अतृप्त आत्माओं का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए लोग विशेष पूजा और तर्पण करके इन बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। विद्वानों का कहना है कि यह दिन मुख्य रूप से पितरों की स्मृति के लिए समर्पित है, इसे ‘पितृ अमावस्या‘ भी कहा जाता है।

चैत्र अमावस्या की पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर सूर्य देव को अर्पित करें। पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद हाथ में काले तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें।

दान और पुण्य कमाना

अंत में अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को दान करें। यह दान और पितृ तर्पण व्यक्ति के लिए पुण्य और घर में खुशहाली लाने का माध्यम बनता है। चैत्र अमावस्या या भूतड़ी अमावस्या को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और पितृ प्रसन्न होते हैं।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।