Devshayani Ekadashi Kab Hai: इस बार व्रत कब है देवशयनी एकादशी? पूजा से पहले जान लें किन कामों से खुलेंगे भाग्य के द्वार और किन गलतियों से रहें दूर

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Devshayani Ekadashi Kab Hai: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं।

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 12:54 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 12:55 PM IST

(Devshayani Ekadashi Kab Hai/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा देवशयनी एकादशी व्रत।
  • इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं।
  • चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है।

नई दिल्ली: Devshayani Ekadashi Kab Hai: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। देवशयनी एकादशी हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह व्रत 25 जुलाई 2026 (Devshayani Ekadashi 2026) को रखा जाएगा। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं।

देवशयनी एकादशी पर क्या करना चाहिए?

इस पवित्र दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है। पूजा के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, मिठाई, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है लेकिन ध्यान रखें कि तुलसी की पत्तियां एक दिन पहले ही तोड़ लें क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित माना जाता है। इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर पूजा करने से शुभ फल मिलते हैं।

इस दिन किन कामों से बचना चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन (Devshayani Ekadashi 2026) सात्विक जीवन अपनाना चाहिए। इस दिन मांसाहार और शराब जैसी तामसिक चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा तुलसी के पौधे को छूने या उसकी पत्तियां तोड़ने से बचना चाहिए। मान्यता है कि एकादशी पर चावल का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी से विवाद करना, अपशब्द बोलना या किसी का अपमान करना अशुभ माना जाता है।

व्रत में रखें इन बातों का ध्यान

देवशयनी एकादशी के दिन (Devshayani Ekadashi 2026) पूजा-पाठ और मन की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे नकारात्मकता से जोड़ा जाता है। श्रद्धा, संयम और अच्छे विचारों के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलने और मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

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देवशयनी एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी?

देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।

देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, इसलिए इसे हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है।

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को क्या अर्पित करना चाहिए?

भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, मिठाई, धूप-दीप और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

देवशयनी एकादशी पर किन चीजों से बचना चाहिए?

इस दिन मांसाहार, शराब, चावल का सेवन, विवाद और अपशब्द बोलने से बचने की मान्यता है।