(Hartalika Teej Vrat 2026/ Image Credit: AI-generated)
Hartalika Teej Vrat 2026: हरितालिका तीज का व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (Hartalika Teej Vrat 2026) को रखा जाता है। इसे तीजा, बड़ी तीज और गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इसे गौरी हब्बा कहा जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि व्रत रखने से अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस साल हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
हरतालिका तीज को कठिन व्रतों (Hartalika Teej Vrat 2026) में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं अन्न, जल और कई जगहों पर फल तक का त्याग करके निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद किया जाता है। माना जाता है कि एक बार यह व्रत शुरू करने के बाद इसे नियमित रूप से निभाना चाहिए। अगर बीमारी या किसी मजबूरी के कारण व्रती खुद व्रत न रख पाए तो परिवार का कोई सदस्य या पति व्रत पूरा कर सकता है।
इस व्रत में दिन और रात सोने से बचने की परंपरा बताई गई है। दिन में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान और भजन किया जाता है, जबकि रात में जागरण करने का विधान है। प्रदोष काल में मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई इस पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके (Hartalika Teej Vrat 2026) पूजा करती हैं। लाल, पीले और हरे रंग के कपड़े शुभ माने जाते हैं। पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और चुनरी जैसी सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ ही सुहाग सामग्री का दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे दांपत्य जीवन में सुख और सौभाग्य बना रहता है।
हरतालिका तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान कथा का पाठ या श्रवण जरूर किया जाता है। इस दिन व्रती को क्रोध, बहस, किसी का अपमान और निंदा करने से बचना चाहिए। शांत मन से भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है।
अगले दिन सुबह भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा (Hartalika Teej Vrat 2026) करने के बाद मिट्टी की प्रतिमाओं का विधि अनुसार विसर्जन किया जाता है। इसके बाद ही व्रत खोलने यानी पारण की परंपरा है। मासिक धर्म की स्थिति में व्रत तोड़ने की जरूरत नहीं होती, ऐसी स्थिति में पूजा से दूर रहकर कथा सुनी जा सकती है और पूजा किसी अन्य महिला या पंडित से कराई जा सकती है। ये सभी धार्मिक मान्यताएं हैं जिनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार करता है।