Pitra Chalisa: क्या घर में रहती है धन की कमी और अशांति? पितृ पक्ष में इस अद्भुत चालीसा की गूंज से साक्षात काल भी पीछे खींच लेता है अपने कदम

Pitra Chalisa: सच्ची श्रद्धा से पितर चालीसा का पाठ करने से पूर्वजों तक हमारी पुकार पहुँचती है। यह पाठ न केवल हमें पितरों का आशीर्वाद दिलाता है, बल्कि हमारे पूर्वजों को सदैव हमारी रक्षा के लिए तत्पर रखता है। आइये यहाँ पढ़ें और सुनें 'श्री पितृ चालीसा'..

Pitra Chalisa: क्या घर में रहती है धन की कमी और अशांति? पितृ पक्ष में इस अद्भुत चालीसा की गूंज से साक्षात काल भी पीछे खींच लेता है अपने कदम

Pitra Chalisa/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

Modified Date: September 29, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: September 29, 2026 3:52 pm IST
HIGHLIGHTS
  • एक अदृश्य रक्षा-कवच है 'श्री पितर चालीसा'!
  • जिस आँगन में गूंजती है 'पितृ चालीसा', वहां काल भी बदल लेता है रास्ता!

Pitra Chalisa: हमारे पूर्वज (पितर) हमारे घर के अदृश्य रक्षक और देवता हैं, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अंश होता है। मृत्यु के बाद यदि हम उनका श्राद्ध, तर्पण या स्मरण नहीं करते, तो वे नाराज हो सकते हैं। पितरों की नाराजगी से जीवन में तरक्की रुक जाती है और शादी, संतान, धन व सेहत से जुड़ी समस्याएं आने लगती हैं।

इन सभी परेशानियों और पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे आसान रास्ता है ‘पितर चालीसा‘ (श्री पितृ चालीसा) का पाठ। यह एक अत्यंत प्रभावशाली पाठ है जो पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन की हर बाधा को दूर कर देता है। पितृ पक्ष के दौरान इस पाठ को करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

जब हम पूरी श्रद्धा से पितर चालीसा का पाठ करते हैं, तो हमारी पुकार पूर्वजों तक अवश्य पहुँचती है। इसके प्रभाव से वे संकट के समय हमारी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं और अपने वंशजों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। यह पाठ न केवल हमें पितरों का आशीर्वाद दिलाता है, बल्कि हमारे अदृश्य पूर्वजों को सदैव हमारी रक्षा के लिए तत्पर रखता है, बस हमें श्रद्धा से उन्हें याद करने की ज़रूरत है। तो फिर देर किस बात की, आइये साथ में पढ़ें और सुनें ‘श्री पितृ चालीसा‘

श्री पितृ चालीसा हिंदी (Shree Pitra Chalisa Lyrics in Hindi)

॥ दोहा ॥

हे पितरेश्वर आपको। दे दियो आशीर्वाद।।
चरणाशीश नवा दियो। रखदो सिर पर हाथ।।

सबसे पहले गणपत। पाछे घर का देव मनावा जी।।
हे पितरेश्वर दया राखियो। करियो मन की चाया जी।।

॥ चौपाई ॥

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर। चरण रज की मुक्ति सागर॥
परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा। मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा॥

मातृ-पितृ देव मनजो भावे।सोई अमित जीवन फल पावे॥
जै-जै-जै पित्तर जी साईं।पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं॥

चारों ओर प्रताप तुम्हारा।संकट में तेरा ही सहारा॥
नारायण आधार सृष्टि का।पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का॥

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।भाग्य द्वार आप ही खुलवाते॥
झुंझुनू में दरबार है साजे।सब देवों संग आप विराजे॥

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा॥
पित्तर महिमा सबसे न्यारी।जिसका गुणगावे नर नारी॥

तीन मण्ड में आप बिराजे।बसु रुद्र आदित्य में साजे॥
नाथ सकल संपदा तुम्हारी।मैं सेवक समेत सुत नारी॥

छप्पन भोग नहीं हैं भाते।शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते॥
तुम्हारे भजन परम हितकारी।छोटे बड़े सभी अधिकारी॥

भानु उदय संग आप पुजावै।पांच अँजुलि जल रिझावे॥
ध्वज पताका मण्ड पे है साजे।अखण्ड ज्योति में आप विराजे॥

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।धन्य हुई जन्म भूमि हमारी॥
शहीद हमारे यहाँ पुजाते।मातृ भक्ति संदेश सुनाते॥

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा।धर्म जाति का नहीं है नारा॥
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई।सब पूजे पित्तर भाई॥हिंदू धर्म

हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा।जान से ज्यादा हमको प्यारा॥
गंगा ये मरुप्रदेश की।पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की॥

बन्धु छोड़ना इनके चरणाँ।इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा॥
चौदस को जागरण करवाते।अमावस को हम धोक लगाते॥

जात जडूला सभी मनाते।नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते॥
धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है॥

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी।सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥
निशदिन ध्यान धरे जो कोई।ता सम भक्त और नहीं कोई॥

तुम अनाथ के नाथ सहाई।दीनन के हो तुम सदा सहाई॥
चारिक वेद प्रभु के साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

नाम तुम्हारो लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं कोई॥
जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत।नवों सिद्धि चरणा में लोटत॥

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी।जो तुम पे जावे बलिहारी॥
जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे।ताकी मुक्ति अवसी हो जावे॥

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे।सो निश्चय चारों फल पावे॥
तुमहिं देव कुलदेव हमारे।तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे॥

सत्य आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावें सोई॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहस्र मुख सके न गाई॥

मैं अतिदीन मलीन दुखारी।करहु कौन विधि विनय तुम्हारी॥
अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै।अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥

॥ दोहा ॥

पित्तरौं को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम।
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम॥

झुंझुनू धाम विराजे हैं,पित्तर हमारे महान।
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान॥

जीवन सफल जो चाहिए,चले झुंझुनू धाम।
पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान॥

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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लेखक के बारे में

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