(Vishwakarma Jayanti 2026/ Image Credit: IBC24 News)
Vishwakarma Jayanti 2026 Date: विश्वकर्मा जयंती हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। यह दिन खासतौर पर कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों, वास्तुकारों, व्यापारियों और मशीनरी से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा (Vishwakarma Jayanti 2026) करने से काम में सफलता, तरक्की और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस साल 2026 में विश्वकर्मा जयंती गुरुवार 17 सितंबर को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा का शुभ समय सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। इस दौरान अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शुभ समय में विधि-विधान से पूजा करना लाभकारी माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा को भाद्र संक्रांति और कन्या संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा (Vishwakarma Jayanti 2026) को देवताओं का दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार बताया गया है। उन्हें निर्माण, वास्तुकला, यांत्रिकी और स्थापत्य कला का ज्ञाता माना जाता है। इसी कारण कारीगर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं। इस दिन कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों की सफाई कर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा की कई अद्भुत रचनाओं का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए कई दिव्य भवन और नगर बनाए थे। द्वारका नगरी, इंद्रप्रस्थ का महल और स्वर्ण लंका के निर्माण को भी भगवान विश्वकर्मा से जोड़ा जाता है। इसके अलावा देवताओं के कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र बनाने की मान्यता भी उनसे जुड़ी है।
पूजा के लिए सबसे पहले घर, दुकान या कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा (Vishwakarma Jayanti 2026) की तस्वीर या प्रतिमा को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। फल-मिठाई का भोग लगाकर आरती करें। साथ ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों को भी पूजा में शामिल करें। मान्यता है कि इससे काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता व तरक्की का आशीर्वाद मिलता है।