Mayawati expels Akash Anand from BSP: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर निकाला, बोलीं- डबल माइंड से पार्टी का भला नहीं हो सकता, उनके ससुर के सन्यास पर कही ये बात

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Mayawati expels Akash Anand from BSP: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर निकाला, बोलीं- डबल माइंड से पार्टी का भला नहीं हो सकता, उनके ससुर के सन्यास पर कही ये बात

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 10:28 AM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 10:52 AM IST

Mayawati expels Akash Anand from BSP: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर निकाला, बोलीं- डबल माइंड से पार्टी का भला नहीं हो सकता, उनके ससुर के सन्यास पर कही ये बात /image: Social Media

HIGHLIGHTS
  • मायावती ने आकाश आनंद को BSP से निकाला
  • ससुर अशोक सिद्धार्थ पर भी साधा निशाना
  • ‘डबल माइंड से पार्टी का भला नहीं’

लखनऊ। Mayawati expels Akash Anand from BSP: उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्डपंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ऐसे में बसपा (Bahujan Samaj Party) सुप्रीमो मायावती ( Mayawati) ने बड़ा फैसला लिया है। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी (Akash Anand Expelled From BSP) से बाहर निकाला दिया है। मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को करियर से ज्यादा परिवार का मोह है, उनका कहना है कि डबल माइंड से पार्टी का भला नहीं हो सकता। इसके साथ ही मायावती ने आकाश के ससुर और BSP नेता अशोक सिद्धार्थ (Ashok Siddharth Retirement) के संन्यास लेने के फैसले पर हमला बोला है, उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट था।

Mayawati expels Akash Anand from BSP बहुजन समाज पार्टी प्रमुख की मायावती ने अपने सोशल मीडिया X अकॉउंट पर एक पोस्ट शर कर 10 बातें लिखी है।

1. आज अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।

2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती।

3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है।

4. कुल मिलाकर,अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।

5. किन्तु अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है।

6. इतना ही नहीं बल्कि आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था।

7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ व आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।

8. ऐसे हालात में आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?

9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।

10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।

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मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से क्यों निकाला?

मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को पार्टी और बहुजन मूवमेंट से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों का मोह है। उन्होंने कहा कि ऐसे ‘डबल माइंड’ के साथ पार्टी का भला नहीं हो सकता।

आकाश आनंद को BSP से कब बाहर किया गया?

मायावती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने की घोषणा की।

आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने क्या फैसला लिया?

अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। मायावती ने इसे देर से लिया गया सही कदम बताया, लेकिन उनकी नीयत पर भी सवाल उठाए।

मायावती ने आकाश आनंद के बारे में क्या कहा?

मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेंट की सफलता से ज्यादा रिश्ते-नातों का मोह है और ऐसे में उनके पार्टी के हित में काम करने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

BSP का आगे क्या लक्ष्य है?

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधियों का मुकाबला करते हुए खासकर उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटने की अपील की है।