एआईएफएफ ने आईएसएल के ‘क्लब-नेतृत्व मॉडल’ पर सैद्धांतिक सहमति दी, चार सितंबर से नए सत्र की तैयारी

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एआईएफएफ ने आईएसएल के ‘क्लब-नेतृत्व मॉडल’ पर सैद्धांतिक सहमति दी, चार सितंबर से नए सत्र की तैयारी

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 08:07 PM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 08:07 PM IST

… फिलेम दीपक सिंह …

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को दो वर्षों तक ‘क्लब-नेतृत्व मॉडल (व्यावसायिक मामलों का अधिकार क्लबों के पास रहेगा)’ के तहत संचालित करने पर ‘‘सैद्धांतिक सहमति’’ दे दी है और इस बारे में खेल मंत्री को भी सूचित कर दिया है। एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस फैसले से आईएसएल के 2026-27 सत्र की शुरुआत सितंबर में तय कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। एआईएफएफ के उप सचिव जनरल एम. सत्यनारायण ने ‘पीटीआई’ को बताया कि कुछ विवरणों को अंतिम रूप देने के बाद अंतिम समझौते पर 15 जून को हस्ताक्षर कर औपचारिक घोषणा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2026-27 का आईएसएल सत्र चार सितंबर से शुरू होगा। उन्होंने कहा, ‘‘“हमने आईएसएल क्लबों के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है और इस बारे में खेल मंत्री को भी सूचित कर दिया है। खेल मंत्रालय ने भी सहमति जताई है। इसलिए हम 15 जून को औपचारिक घोषणा करेंगे। हालांकि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है, कुछ कानूनी पहलुओं और विवरणों पर काम करना बाकी है, जिसे अगले तीन-चार दिनों में पूरा किया जाएगा।” उन्होंने कहा, ‘‘ आईएसएल की शुरुआत चार सितंबर से तय है। डूरंड कप 25 जून से 25 जुलाई के बीच आयोजित किया जाएगा।’’ आईएसएल का आगामी सत्र 14 टीमों के साथ पूर्ण सात महीने का होगा, जिसमें ‘होम और अवे’ प्रारूप में मैच खेले जाएंगे। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने एआईएफएफ और आईएसएल क्लबों से एक कार्यबल बनाने को कहा था, ताकि अगले कम से कम दो सत्र के लिए एक ‘संरचित योजना’ तैयार की जा सके। क्लबों ने 2026-27 और 2027-28 सत्र के लिए दो वर्षों के क्लब-नेतृत्व वाले अस्थायी मॉडल का प्रस्ताव दिया है, जिसे किसी भी दीर्घकालिक व्यावसायिक समझौते से पहले एक अंतरिम समाधान के रूप में देखा जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आईएसएल का स्वामित्व और संचालन का अधिकार एआईएफएफ के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा, “क्लब व्यावसायिक हिस्से का संचालन करेंगे, लेकिन यह एआईएफएफ की निगरानी में होगा। एआईएफएफ ही लीग का मालिक और संचालक बना रहेगा।” उन्होंने कहा, “हम यह कदम क्लबों के हित में उठा रहे हैं क्योंकि उन्हें नुकसान हुआ है। हम अभी भी दीर्घकालिक मॉडल पर विचार कर रहे हैं। दो वर्षों के बाद इस मॉडल की समीक्षा की जाएगी।” क्लबों ने प्रस्ताव दिया है कि वे इस मॉडल को कम से कम दो वर्षों तक लागू करना चाहते हैं, जिसके बाद अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। एआईएफएफ ने यह भी कहा कि वह इस प्रक्रिया में जीनियस स्पोर्ट्स को भी शामिल करेगा। लंदन स्थित जीनियस स्पोर्ट्स ने इस वर्ष टेंडर प्रक्रिया के दौरान आईएसएल के व्यावसायिक अधिकारों के लिए सबसे ऊंची बोली ( 2,129 करोड़ रुपये) लगाई थी। कंपनी ने ‘15+5 वर्षों’ के लिए आईएसएल और एक कप प्रतियोगिता के अधिकार के बदले हर वर्ष भारी निवेश का प्रस्ताव दिया था। प्रस्तावित राजस्व मॉडल के तहत एआईएफएफ को पहले वर्ष में लगभग 12.4 करोड़ रुपये मिलने थे। एआईएफएफ इसके साथ ही क्लबों से प्रवेश शुल्क भी लेना चाहता था लेकिन क्लबों ने विरोध किया। क्लबों ने इसके बजाय दो वर्षों के लिए खुद व्यावसायिक अधिकार लेने और एआईएफएफ को 15 करोड़ रुपये वार्षिक भुगतान करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि रेफरी, विधिक, इंटीग्रिटी और डोपिंग रोधी जैसे नियामक कार्यों का खर्च पूरा किया जा सके। क्लबों ने यह भी आश्वासन दिया है कि एआईएफएफ की नियामक भूमिका पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित रहेगी। इसमें सभी प्रमुख कार्य (रेफरी नियुक्ति, खिलाड़ी पंजीकरण, ट्रांसफर प्रणाली, डोपिंग रोधी और फीफा-एएफसी अनुपालन) एआईएफएफ के पास ही रहेंगे। यह मॉडल व्यावसायिक और नियामक कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग करने पर आधारित है। भाषा आनन्द मोनामोना