एआईटीए: प्रशासक ने मुख्य परिषद में पांच उत्कृष्ट खिलाड़ियों को जगह देने की सिफारिश की

एआईटीए: प्रशासक ने मुख्य परिषद में पांच उत्कृष्ट खिलाड़ियों को जगह देने की सिफारिश की

एआईटीए: प्रशासक ने मुख्य परिषद में पांच उत्कृष्ट खिलाड़ियों को जगह देने की सिफारिश की
Modified Date: July 21, 2026 / 03:55 pm IST
Published Date: July 21, 2026 3:55 pm IST

… अमनप्रीत सिंह …

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासक न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के ढांचे में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिनमें कार्यकारी समिति में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त खिलाड़ियों (एसओएम) के लिए पांच स्थान निर्धारित करने तथा मुख्य परिषद में राज्य संघों के प्रतिनिधियों की संख्या दो से घटाकर एक करने का सुझाव दिया गया है। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव के अनुसार मुख्य परिषद में चार महिलाओं समेत आठ उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मतदान का अधिकार देने मांग की गयी है। इससे संघ के निर्णय लेने की प्रक्रिया में खिलाड़ियों की भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। इन संवैधानिक संशोधनों को लागू करने से पहले रविवार को होने वाली एआईटीए की असाधारण आम बैठक (ईजीएम) में सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। माना जा रहा है कि संघ कुछ सिफारिशों का विरोध कर सकता है। ईजीएम से पहले जारी मसौदा संशोधनों का उद्देश्य एआईटीए के संविधान में व्यापक परिवर्तन कर उसे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप बनाना है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव कार्यकारी समिति के पुनर्गठन से जुड़ा है। वर्तमान में लगभग 25 सदस्यीय कार्यकारी समिति की जगह कानून द्वारा गठित 15-सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इसमें अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, पांच उत्कृष्ट खिलाड़ी, खिलाड़ी समिति के दो प्रतिनिधि तथा पांच क्षेत्रीय सदस्य शामिल होंगे। प्रस्ताव के अनुसार कार्यकारी समिति के कम-से-कम एक-तिहाई सदस्य महिलाएं होंगी। इनमें दो महिला उत्कृष्ट खिलाड़ी और एक महिला खिलाड़ी प्रतिनिधि का होना अनिवार्य रहेगा। संघ की सामान्य सभा के रूप में कार्य करने वाली मुख्य परिषद में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। अब प्रत्येक संबद्ध राज्य संघ दो प्रतिनिधियों के बजाय केवल एक प्रतिनिधि को नामित करेगा। इसके अलावा आठ उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मतदान का अधिकार मिलेगा तथा भारतीय पैरालंपिक समिति के एक नामित सदस्य को भी परिषद में शामिल किया जाएगा। मसौदा संविधान में पहली बार ‘उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त खिलाड़ी’ की श्रेणी का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सार्वजनिक आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे और योग्यता आधारित सूची तैयार कर खिलाड़ियों को प्रशासनिक ढांचे में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। न्यायमूर्ति मित्तल ने उपाध्यक्ष (खेल) तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष/उपाध्यक्ष (चेयर) के पद समाप्त करने का भी प्रस्ताव रखा है। उनके अनुसार यह परिवर्तन खेल प्रशासन अधिनियम में निर्धारित नए प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप है। इसके अलावा वर्तमान एथलीट आयोग के स्थान पर कानूनी रूप से गठित एथलीट समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इस समिति के चुनाव एआईटीए चुनावों के साथ एक स्वतंत्र निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में होंगे। समिति के कम-से-कम आधे सदस्य महिलाएं होंगी और इसके प्रतिनिधियों को कार्यकारी समिति में शामिल होने के लिए अध्यक्ष की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। मसौदे में संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने के लिए आचार समिति (एथिक्स कमेटी) को स्थायी एवं स्वतंत्र निकाय बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसे पदाधिकारियों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, अधिकारियों और संबद्ध इकाइयों से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार होगा। इसी प्रकार मौजूदा मध्यस्थता समिति के स्थान पर स्थायी विवाद निवारण समिति गठित करने का प्रस्ताव है, जिसे मध्यस्थता और सुलह, दोनों प्रक्रियाएं संचालित करने का अधिकार होगा। इसका लक्ष्य रखा गया है कि विवादों का निपटारा 90 दिनों के भीतर किया जाए। साथ ही, पहली बार कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। भाषा आनन्द मोनामोना


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