एआईटीए के चुनावों के नतीजे बरकरार, पर गीता मित्तल प्रशासक नियुक्त

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एआईटीए के चुनावों के नतीजे बरकरार, पर गीता मित्तल प्रशासक नियुक्त

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 05:20 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 05:20 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को 28 सितंबर 2024 को हुए अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के चुनावों के नतीजों को बरकरार रखने की अनुमति दे दी लेकिन निर्देश दिया कि चुनी हुई संस्था केवल अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की देखरेख में एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर काम करेगी।

अपने आदेश में न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने यह स्पष्ट किया कि हालांकि 2024 के चुनावों के नतीजों में इस चरण पर कोई बदलाव नहीं किया जाएगा लेकिन कार्यकारी समिति सीमित क्षमता में काम करेगी और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की देखरेख में रहेगी।

इसका मतलब है कि गुजरात राज्य संघ के चिंतन पारिख एआईटीए के नए अध्यक्ष हैं जबकि महाराष्ट्र के सुंदर अय्यर महासचिव हैं। पंजाब संघ के दिनेश अरोड़ा कोषाध्यक्ष हैं जबकि केएसएलटीए के सुनील यजमान संयुक्त सचिवों में से एक हैं।

अय्यर ने पीटीआई से कहा, ‘‘भारत में टेनिस के लिए यह एक शानदार पल है। हम बस यही चाहते हैं कि देश में इस खेल को बढ़ावा दें और इसे शिखर तक ले जाएं। हम जूनियर टेनिस के लिए भी बहुत कुछ करना चाहते हैं। हालांकि हम फिलहाल एक अंतरिम संस्था के तौर पर काम करेंगे, फिर भी यह एक ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है जिससे भारतीय टेनिस पारिस्थितिकी तंत्र को फायदा होगा।’’

अदालत ने न्यायमूर्ति मित्तल को एआईटीए के कामकाज को संभालने और यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा कि इसका कामकाज 30 जून तक राष्ट्रीय खेल संहिता और संशोधित संविधान और उप नियमों के अनुरूप हो।

अभी एआईटीए में 25 सदस्यों वाली कार्यकारी समिति है लेकिन एनएसजी अधिनियम के अनुसार इसमें 15 सदस्य होने चाहिए।

उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि संविधान को खेल अधिनियम 2025 और खेल प्रशासन नियम 2026 के अनुरूप बनाने के तीन महीने के भीतर नए चुनाव कराए जाएं।

तब तक वर्तमान पदाधिकारी केवल नियमित कामकाज संभालने का काम जारी रखेंगे।

यजमान ने कहा, ‘‘मैं माननीय अदालत के फैसले का पूरी तरह से स्वागत करता हूं। मुझे खुशी है कि लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध खत्म हो गया है और यह एआईटीए तथा भारतीय टेनिस के लिए एक बड़ा कदम है।’’

अदालत ने अंतरिम निकाय पर कुछ पाबंदियां लगाईं और निर्देश दिया कि वह प्रशासक की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी नई वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं करेगा। अदालत ने यह भी अनिवार्य किया कि कार्यकारी समिति को संशोधित उप नियमों के अनुरूप ही कार्य करना होगा।

इसके अलावा अदालत ने एआईटीए को निर्देश दिया कि वह प्रशासक को आवश्यक बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करे जिसमें उनके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक कार्यालय स्थान, कर्मचारी और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।

प्रशासक को अतिरिक्त कर्मचारियों को नियुक्त करने की भी स्वतंत्रता दी गई है। इन सभी खर्चों का वहन एआईटीए द्वारा किया जाएगा जिसमें 10 लाख रुपये का मासिक पारिश्रमिक भी शामिल है।

अदालत ने जारी किए गए निर्देशों के आधार पर रिट याचिका और उसके साथ लंबित अन्य आवेदनों का निपटारा कर दिया।

सितंबर 2024 में हुए चुनावों को भारत के पूर्व खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन और पूरव राजा ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने चुनावों के संचालन, पात्रता मानदंडों और खेल संहिता के पालन को लेकर चिंताएं जताई थीं।

उससे भी काफी पहले एआईटीए के भीतर आपसी कलह इस हद तक पहुंच गई थी कि कई सदस्य राज्यों ने अध्यक्ष अनिल जैन के खिलाफ पद के दुरुपयोग के आरोप में अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना ली थी लेकिन मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था।

भाषा सुधीर

सुधीर