(सुमन रे)
ग्लास्गो, दो अगस्त (भाषा) ओलंपिक रजत पदक विजेता और लगातार तीन बार राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू ने स्वीकार किया कि अपेक्षाओं का दबाव हमेशा रहता है, लेकिन अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में पदक जीतना है।
चानू ने 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक के साथ अपनी सफलता की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 2018 के गोल्ड कोस्ट, 2022 के बर्मिंघम और 2026 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अपने भार वर्ग में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 2017 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2022 और 2025 में रजत पदक भी जीते हैं। इसके अलावा एशियाई और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में भी वह पदक अपने नाम कर चुकी हैं।
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में सफल अभियान के बाद रविवार को ‘पीटीआई’ से बातचीत में चानू ने कहा, ‘‘पदक जीतकर बहुत खुशी मिलती है, लेकिन उसे जीतना आसान नहीं होता। इसके बाद जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और आगामी प्रतियोगिताओं में आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने का दबाव होता है। काफी दबाव रहता है। मेरे लिए एशियाई खेलों का पदक बहुत महत्वपूर्ण है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं पूरी कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे वहां पदक जीतना है, जहां मैं अब तक नहीं जीत सकी हूं। इसलिए एशियाई खेल मेरे लिए बहुत अहम हैं। मेरा अगला लक्ष्य वहीं पदक जीतना है जिससे दबाव भी है। ’’
चानू ने कहा कि उनके लिए हर पदक आगे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा बनता है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ खिलाड़ी पदक जीतकर बहुत खुश हो जाते हैं, लेकिन मेरे लिए हर पदक नई ताकत देता है। मुझे लगता है कि अगला पदक जीतने के लिए और भी अधिक मेहनत करनी होगी। ’’
अपने करियर के अच्छे और दुखद पलों को याद करते हुए चानू ने कहा कि दोनों अलग-अलग ओलंपिक से जुड़े हैं और पेरिस ओलंपिक में मामूली अंतर से पदक चूकने के बाद दोबारा खुद को संभालना आसान नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘‘हर प्रतियोगिता में पदक जीतने का दबाव रहता है। हर खिलाड़ी का सपना ओलंपिक में भाग लेना होता है। वहां पदक जीतना मेरा भी सपना था, लेकिन पेरिस ओलंपिक में बहुत मामूली अंतर से पदक चूकने का मुझे बेहद दुख हुआ। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘उसके बाद खुद को दोबारा तैयार करना और सर्वोच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना बहुत कठिन था। मुझे आगे की योजना बनानी पड़ी और कड़ी मेहनत करनी पड़ी। ’’
चानू ने अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपने ऊपर रखी गई जिम्मेदारियों और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 में ग्लास्गो में भारत के लिए रजत पदक जीतकर मुझे बहुत खुशी हुई। उसके बाद भारतीय भारोत्तोलन को लेकर मेरी जिम्मेदारियां बढ़ गईं। मुझे तय करना था कि मैं क्या करना चाहती हूं और कितनी दूर तक जाना चाहती हूं। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘धीरे-धीरे मैं अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन को समझने लगी और यह भी पता चला कि इसके लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। मैंने भारतीय भारोत्तोलन के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। समय के साथ सभी का सहयोग मिला और मुझे खुशी है कि अपने कोच विजय शर्मा की मदद से मैं यह सब हासिल कर सकी। ’’
एशियाई खेलों की तैयारियों पर चानू ने कहा कि वह किसी विशेष ट्रेनिंग की योजना नहीं बना रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह होगी कि खेलों तक मैं चोट से दूर रहूं। किसी विशेष ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है, सामान्य अभ्यास ही जारी रहेगा। ’’
उन्होंने यह भी कहा कि खेल रत्न पुरस्कार मिलने के बावजूद अगर उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिलता है तो उन्हें बेहद खुशी होगी क्योंकि यह उनके बचपन का सपना है।
भाषा नमिता आनन्द
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