… फिलेम दीपक सिंह…
भुवनेश्वर, 24 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के 18 वर्षीय तार गोला फेंक (हैमर थ्रो) खिलाड़ी अनुष्का यादव ने बुधवार को राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के शुरुआती दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम करते हुए सभी को चौंका दिया। बागपत जिले के बालैनी गांव की किसान परिवार से आने वाली अनुष्का ने 67.02 मीटर का थ्रो कर 2017 में सरीता सिंह द्वारा बनाए गए 65.25 मीटर के नौ साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया। वह वर्तमान में देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक एथलीट भी हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया और छह प्रयासों में दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड को बेहतर किया। उन्होंने पहले प्रयास में 62.07 मीटर, दूसरे प्रयास में 65.64 मीटर और तीसरे में 64.81 मीटर का थ्रो किया। अंतिम प्रयास में उन्होंने 67.02 मीटर फेंककर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। उनका यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के 61.72 मीटर के एशियाई खेलों के क्वालीफिकेशन मानक से भी बेहतर रहा। वह हालांकि इस सत्र में अब तक एशियाई तार गोला फेंक खिलाड़ियों की सूची में 11वें स्थान पर है। उत्तर प्रदेश की ही तान्या चौधरी 61.70 के प्रयास के साथ दूसरे जबकि दिल्ली की हर्षिता श्रीवास्तव 60.92 के प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रही। अनुष्का पहले 100 मीटर दौड़ में रुचि रखती थीं, लेकिन बाद में उनके पिता और शुरुआती कोच सुशील यादव की सलाह पर उन्होंने ताल गोला फेंक को चुना। उनके पिता भी पूर्व तार गोला फेंक खिलाड़ी रहे हैं। अनुष्का ने कहा, “मेरे पिता मुझे हैमर थ्रो करवाते हैं। मेरे तीन कोच हैं, जिनमें मेरे पिता और चिराग यादव शामिल हैं। मैं अपने स्थानीय मैदान पर अभ्यास करती हूं।” उन्होंने कहा, “मैं 70 मीटर से ज्यादा थ्रो करना चाहती हूं और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं।” पुरुषों की पोल वॉल्ट स्पर्धा में मध्य प्रदेश के देव मीना ने 5.46 मीटर की ऊंचाई पार कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 5.45 मीटर के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हाल ही में फेडरेशन कप में मीना और कुलदीप कुमार ने एक समान 5.45 मीटर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी की थी, जिसके बाद यह नया रिकॉर्ड स्थापित हुआ। मध्य प्रदेश के कुलदीप 5.20 मीटर के साथ तीसरे जबकि तमिलनाडु के जी रीगन 5.30 मीटर के प्रयास के साथ दूसरे स्थान पर रहे। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी 100 मीटर बाधा दौड़ खिलाड़ी ज्योति याराजी ने चोट के कारण लगभग एक वर्ष तक मैदान से दूर रहने के बाद इस चैंपियनशिप के पहले दिन ही एशियाई खेलों का क्वालीफिकेशन मानक हासिल कर शानदार वापसी की। पिछले वर्ष जुलाई में एसीएल (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) की सर्जरी कराने वाली ज्योति ने हीट रेस में 13.14 सेकंड का समय निकाला। यह प्रदर्शन एएफआई द्वारा एशियाई खेलों के लिए निर्धारित 13.34 सेकंड के क्वालीफिकेशन मानक से बेहतर रहा। उन्होंने इसके बाद फाइनल में 12.99 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता। छब्बीस वर्षीय ज्योति दोनों पैरों पर टेप लगाकर दौड़ीं और चोट से वापसी के बावजूद प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ज्योति ने 2022 एशियाई खेलों में भारत के लिए रजत पदक जीता था। उनके नाम 100 मीटर बाधा दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 12.78 सेकंड का है, जिसे उन्होंने 2023 में स्थापित किया था। उन्हें पिछले वर्ष जून में अभ्यास के दौरान गंभीर चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स से दूर रहना पड़ा। ज्योति ने कहा, ‘‘मैं और बेहतर समय की उम्मीद कर रही थी, लेकिन मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। ठीक एक साल पहले इसी दिन मुझे चोट लगी थी। आज उसी दिन मैं ट्रैक पर वापस लौटी और मैंने खुद को साबित किया। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है।” उन्होंने अपने कोच जेम्स हिलर का धन्यवाद करते हुए कहा, “कल उन्होंने मुझे एक लंबा पत्र लिखा, जिसमें बताया कि हमने कितनी मेहनत की है। उन्होंने मुझे मेरी पसंदीदा ब्लूबेरी और खिलौने भी दिए।” ज्योति ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं शारीरिक रूप से कितनी मजबूत हूं, लेकिन मानसिक रूप से मैं पहले से 10 गुना बेहतर हूं। यही मुझे बेहतर करने का हौसला देता है। भाषा आनन्द आनन्द