(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 24 जून (भाषा) इजराइल सेना ने अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच गाजा में की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान ‘‘जानबूझकर और लक्षित करके’’ 20,000 से अधिक फलस्तीनी बच्चों की जान ली। यह दावा भारत के पूर्व न्यायाधीश श्रीनिवासन मुरलीधर की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने किया है।
उड़ीसा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुरलीधर ने मंगलवार को जिनेवा में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आयोग को फलस्तीनी बच्चों की ‘‘जान-बूझकर और लक्षित करने की गई हत्याओं’’ के बारे में ‘‘अकाट्य सबूत’’ मिले हैं, जिसमें अक्टूबर 2025 में हुए संघर्ष विराम के बाद की घटनाएं भी शामिल हैं।
स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने अपनी 100 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि सात अक्टूबर 2023 और सात अक्टूबर 2025 के बीच गाजा में हुई हिंसा के कारण कम से कम 20,179 बच्चे मारे गए और 44,143 बच्चे घायल हुए। इस दौरान मारे गए लोगों में बच्चों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत और घायल हुए लोगों में 26 प्रतिशत थी।
इजराइल ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया और इसे ‘‘झूठा और मनगढ़ंत’’ करार दिया।
इजराइल ने कहा, ‘‘ जांच आयोग मूल रूप से एक दोषपूर्ण व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सच का पता लगाने के बजाय इजराइल को अलग-थलग करना और उसे बदनाम करना है।’’
आयोग ने सात अक्टूबर 2023 के दिन से फलस्तीनी बच्चों के खिलाफ हुए उल्लंघनों और अपराधों की जांच की, जिसमें इजराइली सुरक्षा बलों द्वारा पहुंचाया गया गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान भी शामिल है। इसी दिन हमास ने इजराइल पर हमला किया था।
दक्षिणी इजराइल पर हमास द्वारा किये गए हमले में करीब 1200 लोग मारे गए थे। हमास ने 251 लोगों बंधक भी बना लिया था।
मुरलीधर ने कहा, ‘‘आयोग को फलस्तीनी बच्चों की जान-बूझकर और लक्षित करके हत्या करने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसमें अक्टूबर 2025 के संघर्ष-विराम के बाद की घटनाएं भी शामिल हैं। साथ ही, बच्चों को यताना देने, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार (जिसमें यौन और लैंगिक हिंसा भी शामिल है) और बच्चों के लिए जरूरी अहम बुनियादी ढांचों—जैसे अनाथालय, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुविधाओं-को निशाना बनाने के सबूत भी मिले हैं।’’
उन्होंने कहा कि सात अक्टूबर 2023 और अक्टूबर 2025 के बीच बच्चों की ‘‘बड़े पैमाने पर और सुनियोजित’’ तरीके से हत्या की गई और उन्हें नुकसान पहुंचाया गया।
आयोग ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बसे इजराइलियों द्वारा फलस्तीनी बच्चों के खिलाफ की जाने वाली हिंसा में हुई भारी बढ़ोतरी की भी जांच की।
रिपोर्ट में कहा गया कि सात अक्टूबर, 2023 तक, गाज़ा की लगभग आधी आबादी 18 साल से कम उम्र की थी। ‘‘ये बच्चे पहले से ही इजराइली नाकेबंदी और कब्जे के साये में अपनी पूरी ज़िंदगी बिता चुके थे और उन्होंने कई बार संघर्ष और सदमे का सामना किया था।’’
आयोग ने संघर्ष के पिछले दौर की तुलना में मारे गए बच्चों की संख्या में हुई बढ़ोतरी को रेखांकित किया। उसने बताया कि 2008-2009 और 2014 में हुई लड़ाई के दौरान संघर्ष से जुड़ी मौतों में बच्चों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 तक गाजा में मारे गए बच्चे, वहां की 12 लाख बच्चों की आबादी का लगभग दो प्रतिशत हैं। इस दौरान पांच साल से कम उम्र के कम से कम 5,031 बच्चे मारे गए, जिनमें से 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे और लगभग 420 नवजात शिशु थे।
मुरलीधर ने कहा कि आयोग का निष्कर्ष है कि ‘‘इजराइल बच्चों को निशाना बनाता है ताकि आबादी की जीवंतता को कमजोर किया जा सके और फलस्तीनी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार से उन्हें वंचित किया जा सके।’’
उन्होंने कहा,‘‘हमारी रिपोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि वेस्ट बैंक में बसने वालों द्वारा की गई हिंसा, इजराइल सरकार की नीतियों को लागू करने का एक ज़रिया है। इसमें सरकार और हिंसक समूह, दोनों ही एक ही रणनीतिक मकसद यानी गैर-कानूनी तौर पर इलाके का विस्तार के लिए मिलकर काम करते हैं।’’
मुरलीधर ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी निष्कर्ष निकाला गया है कि हमास ने गाजा में फलस्तीनियों के खिलाफ बार-बार गंभीर अत्याचार किए हैं। हमास ने इजराइली सैन्य कार्रवाई और कानून-व्यवस्था के व्यापक पतन की आड़ में फलस्तीनियों के दमन, यातना और गैर-कानूनी हत्याओं के अभियान चलाए हैं।
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट ‘‘हमास द्वारा बेरहमी से मारे गए, अपहरण किए गए और निशाना बनाए गए इजराइली बच्चों को पूरी तरह से नजरअंदाज करती है, जबकि फलस्तीनी बच्चों को मानव ढाल और युद्ध के मोहरे के रूप में हमास के निंदनीय उपयोग को अनदेखा करती है’’।
मंत्रालय ने कहा कि जांच आयोग के दावों को सत्यापित के लिए कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है।
भाषा धीरज माधव
माधव